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टीका मुहूर्त- दोपहर एक बजकर १० मिनट से बजकर १७ मिनट तक रहेगा

टीका मुहूर्त- दोपहर एक बजकर १० मिनट से बजकर १७ मिनट तक रहेगा
भास्कर न्यूज|जींद


शुक्रवारको भैयादूज पर तिलक करने का शुभ मुहूर्त दोपहर दो घंटे 7 मिनट तक रहेगा। लेकिन सुबह से लेकर शाम सूर्य ढलने के पहले तक भाइयों को तिलक कर सकती हैं। इस बार तीन साल बाद शुक्रवार के दिन भैयादूज का त्योहार आया है। इसके पहले 28 अक्टूबर 2011 को शुक्रवार के दिन भैयादूज आया था। अगले वर्ष 2016 को 1 नवंबर के भैयादूज दूज का त्योहार आएगा।
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को मनाए जाने वाला हिन्दू धर्म का पर्व है। जिसे यम द्वितीया भी कहते हैं। भैयादूज में हर बहन रोली एवं अक्षत से अपने भाई का तिलक कर उसके उज्ज्वल भविष्य के लिए आशीष देती हैं।
मान्यता: कथाके अनुसार। यमी यमराज की बहन हैं जिनसे यमराज काफी प्रेम स्नेह रखते हैं। कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को एक बार जब यमराज यमी के पास पहुंचे तो यमी ने अपने भाई यमराज की खूब सेवा सत्कार की। बहन के सत्कार से यमराज काफी प्रसन्न हुए और उनसे कहा कि बोलो बहन क्या वरदान चाहिए। भाई के ऐसा कहने पर यमी बोली की जो प्राणी यमुना नदी के जल में स्नान करे वह यमपुरी जाए। यमी की मांग को सुनकर यमराज चिंतित हो गए। यमी भाई की मनोदशा को समझकर यमराज से बोली अगर आप इस वरदान को देने में सक्षम नहीं हैं तो यह वरदान दीजिए कि आज के दिन जो भाई बहन के घर भोजन करे और मथुरा के विश्राम घट पर यमुना के जल में स्नान करे उस व्यक्ति को यमराज का भय नहीं होगा।
भैयादूज पर तिलक की विधि
इसपूजा में भाई की हथेली पर बहनें चावल का घोल लगाती हैं उसके ऊपर सिंदूर लगाकर कद्दू के फूल, पान, सुपारी मुद्रा आदि हाथों पर रखकर धीरे-धीरे पानी हाथों पर छोड़ते हुए कुछ मंत्र बोलती हैं जैसे गंगा पूजे यमुना को यमी पूजे यमराज को, सुभद्रा पूजा कृष्ण को, गंगा यमुना नीर बहे मेरे भाई की आयु बढ़े। इसी प्रकार कहीं इस मंत्र के साथ हथेली की पूजा की जाती है। संध्या के समय बहनें यमराज के नाम से चौमुख दीया जलाकर घर के बाहर रखती हैं। इस समय ऊपर आसमान में चील उड़ता दिखाई दे तो बहुत ही शुभ माना जाता है। इस संदर्भ में मान्यता यह है कि बहनें भाई की आयु के लिए जो दुआ मांग रही हैं उसे यमराज ने कुबूल कर लिया है या चील जाकर यमराज को बहनों का संदेश सुनाएगा। (COURSTEY BHASKAR NOV 13)

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