हरियाणा

भूजल निकाल रही इंडस्ट्री ने 30 सितंबर तक अनुमति नहीं ली तो रोज लगेगा Rs.5 हजार जुर्माना

COURTESY DAINIK BHASKAR SEP 12

भूजल निकाल रही इंडस्ट्री ने 30 सितंबर तक अनुमति नहीं ली तो रोज लगेगा Rs.5 हजार जुर्माना
केंद्रीय भूजल प्राधिकरण के क्षेत्रीय निदेशक ने उद्यमियों से कहा- एनओसी लेने में न बरतें कोताही
अनुमति के लिए एक साल में महज 32 इंडस्ट्री ने ही किया आवेदन

जमीन से पानी निकाल रही इंडस्ट्री के पास 30 सितंबर तक केंद्रीय भूजल प्राधिकरण (सीजीडब्ल्यूए, सेंट्रल ग्राउंड वाटर अथॉरिटी) से अनुमति लेने का वक्त है। फिर प्रतिदिन 5 हजार जुर्माना लगेगा। एक साल से इसके लिए प्रयास चल रहा है लेकिन अब तक सिर्फ 32 इंडस्ट्री ने ही आवेदन किया है और पानीपत में सिर्फ 6 के पास भूजल निकालने की अनुमति है। आवेदन के लिए सिर्फ 19 दिन बचे हैं। इसलिए बुधवार को यहां जिमखाना क्लब सीजीडब्ल्यूए के रीजनल डायरेक्टर अनूप नागर की टीम ने उद्यमियों के साथ बैठक की और उन्हें भूजल संबंधी एनओसी लेने की अनिवार्यता बताई। बैठक में एक बड़ी बात सामने आई- इसके पास हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मंजूरी है, वहीं आवेदन कर सकते हैं। हैरान करने वाली एक और बात है कि जिले में 15 हजार से अधिक इंडस्ट्री ऐसी है जो भूजल निकाल रही है। लेकिन इनमें से सिर्फ 508 के पास ही बोर्ड की अनुमति है। इससे पहले नागर ने कहा कि प्राधिकरण ने अब आवेदन करना आसान कर दिया है। इसलिए, आवेदन कर परेशानी से मुक्त हो जाएं।
15 हजार से अधिक इंडस्ट्री निकाल रही भूजल, 508 के पास ही है मंजूरी
उद्याेगपतियाेँ की बैठक काे संबोधित करते अनूप नागर।
अनुमति के लिए 6 डॉक्यूमेंट की अनिवार्यता खत्म की
आवेदन करने के लिए अब इंडस्ट्री का साइट प्लान या अप्रूव्ड नक्शे की जरूरत नहीं है।
रजिस्ट्री पेपर की जरूरत नहीं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से ईटीपी संबंधी सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं।
रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रपोजल की जरूरत नहीं (10 हजार लीटर प्रतिदिन उपयोग करने वाले को प्रपोजल देना होगा)।
रोजाना 10 हजार लीटर से कम उपयोग है तो शपथ पत्र देने की जरूरत नहीं।
पहले इंडस्ट्री के 5 किलोमीटर व्यास की रिपोर्ट देनी होती थी। अब 5 लाख लीटर से ऊपर का उपयोग है तो ही देना होगा।
आवेदन के लिए अब क्या-क्या चाहिए
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से इंडस्ट्री चलाने की मंजूरी।
रोज 10 हजार लीटर तक का उपयोग है तो रेन वाटर हार्वेस्टिंग का हाथ से बना डिजाइन मंजूर होगा। इससे ऊपर के उपयोग पर प्रपोजल देना होगा।
लिखकर देना होगा कि दूसरे सोर्स से पानी नहीं मिल रहा है। रोज 10 हजार लीटर तक पानी का उपयोग है तो खुद लिखकर दे सकते हैं। पानी का उपयोग ज्यादा है तो संबंधित विभाग से लिखवाकर देना होगा कि वह विभाग आपको पानी नहीं दे पा रहा है।
रोज 50 हजार लीटर से ज्यादा का यूज है तो किसी एजेंसी से जारी पानी की उपलब्धता संबंधी सर्टिफिकेट देना होगा।
जिमखाना क्लब में ग्राउंड वाटर काे लेकर अायाेजित मीटिंग में उपस्थित उद्याेगपति।
कहां करें आवेदन
अफसरों को पता है, कहां-कहां दोहन हो रहा है
सीजीडब्ल्यूए के रीजनल डायरेक्टर नागर ने कहा कि सेक्टर-29 पार्ट-1 व 2, सेक्टर-25 पार्ट-1 व 2, अाेल्ड इंडस्ट्रियल एरिया, बबैल राेड अादि क्षेत्राें में डाइंग इंडस्ट्रियां लगी हुई हैं। हर इंडस्ट्री में पानी का उपयोग हो रहा है। इसलिए, सभी समय रहते आवेदन कर एनओसी ले लें। डायरेक्टर ने एरिया बताकर जता दिया कि प्राधिकरण को पता है कि कहां-कहां इंडस्ट्री भूजल दोहन कर रही है।
इन उद्यमियों ने मांगे सवालों के जवाब
बैठक में डायर्स एसोसिएशन के प्रधान भीम सिंह राणा, उत्तर भारत रोटर्स स्पिनर्स एसोसिएशन के प्रधान प्रीतम सिंह सचदेवा, सेक्टर-29 पार्ट-1 एसोसिएशन के प्रधान श्रीभगवान अग्रवाल, पानीपत एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के प्रधान ललित गोयल, ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया से पूर्व प्रधान विनोद ग्रोवर, राजीव अग्रवाल, विभु पालीवाल, चैंबर के सचिव मनीष अग्रवाल, नितिन अराेड़ा, विनीत शर्मा, संजीव गर्ग, मुकेश रेवड़ी, अशाेक गुप्ता अादि मुख्य रूप से माैजूद रहे।
www.cgwa-noc.gov.in पर आप ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।

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