राष्ट्रीय

मनमोहन: नौकरियों वाले सेक्टर मजबूत करने होंगे, उन्हें सरल कर्ज देंगे तो ही अर्थव्यवस्था सुधरेगी

COURTESY DAINIK BHASKAR SEP 12

मनमोहन: नौकरियों वाले सेक्टर
मजबूत करने होंगे, उन्हें सरल कर्ज
देंगे तो ही अर्थव्यवस्था सुधरेगी
सवाल: मौजूदा आर्थिक हालात से निपटने के लिए आप मोदी सरकार को क्या सलाह देंगे?

नई दिल्ली | पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह मानते हैं कि देश मंदी के दौर से गुजर रहा है। इसलिए नौकरियां देने वाले सेक्टरों को मजबूत करना होगा। दैनिक भास्कर के राजनीतिक संपादक हेमन्त अत्री ने उनसे मोदी सरकार के 100 दिन पूरे होने पर सरकार की नीतियों और अर्थव्यवस्था की चुनौतियों पर बात की। उन्होंने आर्थिक हालात सुधारने के लिए पांच कदम उठाने की बात कही। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश...
देश के आर्थिक हालात कैसे सुधरेंगे?
मोदी सरकार को पूर्ण बहुमत एक बार नहीं, बल्कि दो बार मिला है। जब मैंने वित्त मंत्री या प्रधानमंत्री था तो इतना बड़ा जनादेश नहीं था। इसके बावजूद हमने 1991 के संकट और 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट को सफलतापूर्वक पार किया। अब देश एक लंबी आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा है, जो स्ट्रक्चरल और साइक्लिक दोनों है। पहला कदम तो यही स्वीकार करना चाहिए है कि हम संकट का सामना कर रहे हैं। सरकार को चाहिए कि वह विशेषज्ञों और सभी स्टेकहोल्डर्स की बात खुले दिमाग से सुने। लेकिन, दुर्भाग्य से मुझे अभी तक मोदी सरकार की कोई फोकस्ड अप्रोच दिखाई नहीं दी है। मोदी सरकार को हेडलाइन प्रबंधन की आदत से बाहर आने की जरूरत है। पहले ही बहुत समय बर्बाद हो चुका है। अब सेक्टर वार घोषणाएं करने के बजाए पूरे आर्थिक ढांचे को एक साथ आगे बढ़ाने पर काम होना चाहिए। इसके पांच तरीके हैं।
पहला- जीएसटी को तर्कसंगत करना होगा, भले ही थोड़े समय के लिए टैक्स का नुकसान हो। दूसरा- ग्रामीण खपत बढ़ाने और कृषि को पुनर्जीवित करने के लिए नए तरीके खोजने होंगे। कांग्रेस के घोषणापत्र में में ठोस विकल्प हंै, जिसमें कृषि बाजारों को फ्री करके लोगों के पास पैसा लौट सकता है। तीसरा- पूंजी निर्माण के लिए कर्ज की कमी देर करनी होगी। सिर्फ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक नहीं, बल्कि एनबीएफसी भी ठगे जाते हैं। चौथा- कपड़ा, ऑटो, इलेक्ट्रॉनिक्स और रियायती आवास जैसे प्रमुख नौकरी देने वाले क्षेत्रों को पुनर्जीवित करना होगा। इसके लिए आसान कर्ज देना होगा। खासकर एमएसएमई को। पांचवां- हमें अमेरिका-चीन में चल रहे ट्रेडवॉर के चलते खुल रहे नए निर्यात बाजारों काे पहचाना होगा। याद रखना चाहिए कि साइक्लिक और स्ट्रक्चरल दोनों समस्याओं का समाधान जरूरी है। तभी हम 3-4 साल में उच्च विकास दर को वापस पा सकते हैं।

कुछ कहना है? अपनी टिप्पणी पोस्ट करें
tatkalnews.com
AAR ESS Media
newstatkal@gmail.com
tatkalnews181@gmail.com
Visitor's Counter : 96244263
Copyright © 2016 AAR ESS Media, All rights reserved.
Desktop Version