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'सोशल मीडिया तनाव बढ़ाने के साथ खुदकुशी के तरीके भी बता रहा'

COURTESY NBT SEPT 11

रिवार में अगर किसी ने सुसाइड किया है तो...

डॉक्टर बेहरा ने कहा कि हम यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि परिवार में अगर किसी ने सुसाइड किया है तो उसके आगे की पीढ़ी में सुसाइड करने की प्रवृत्ति कितनी है। उन्होंने कहा कि लगभग 40 पर्सेंट तक खतरा है कि उनकी आगे की पीढ़ी में भी सुसाइड की प्रवृत्ति हो।



इन डिजिटल सुसाइड नोट को पढ़ना होगा

डॉक्टर चितरंजन बेहरा ने बताया कि सोशल मीडिया पर तनाव में जी रहे लोगों के अपडेट्स तेजी से बदलते हैं। ये एक तरह से इलेक्ट्रॉनिक सुसाइड नोट की तरह हैं। ऐसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की जरूरत है, जो सोशल मीडिया पर नजर रखे ताकि ऐसे लोगों की काउंसलिंग की जा सके।• एम्स में हर साल औसतन 1800 मामले पोस्टमार्टम के लिए आते हैं। एक तिहाई मामले सुसाइड के हैं• अधिकांश सुसाइड के कारण घरेलू हैं, जिसमें इपल्सिव (आवेग में आकर) लोग सुसाइड कर लेत हैं• संकेत हैं कि जिनके परिवार में सुसाइड हुए हैं, उनके आगे की पीढ़ी में इसका 40 पर्सेंट खतरा है
सुसाइड का

बढ़ता ग्राफ


12 साल की एक बच्ची टीवी पर एक सीरियल अक्सर देखती थी। एक दिन उसने सीरियल में देखा कि एक प्रेमी जोड़ा है, जो सुसाइड कर लेता है और उन दोनों का पुनर्जन्म हो जाता है। बच्ची इससे इतनी प्रभावित हो गई कि उसने पुनर्जन्म को सही मान लिया और खुद सुसाइड कर लिया।
'सोशल मीडिया तनाव बढ़ाने के साथ खुदकुशी के तरीके भी बता रहा'
Rahul.Anand@timesgroup.com

• नई दिल्ली : छोटी-बड़ी हर उम्र के लोगों के लिए सोशल मीडिया जिंदगी का हिस्सा बन गया है। लेकिन संचार का यह माध्यम सुसाइड को बढ़ावा देने में भी पीछे नहीं है। डॉक्टरों का कहना है कि सोशल मीडिया खुदकुशी को दोहरे स्तर पर बढ़ा रहा है। एक तो इसकी वजह से लोगों का तनाव काफी बढ़ जाता है। दूसरे, लोग यहीं से सुसाइड के नए-नए तरीके ढूंढते हैं। फिर उन तरीकों का इस्तेमाल अपनी जान देने में करते हैं। एम्स के डॉक्टर का कहना है कि हमें सोशल मीडिया के इस्तेमाल और इससे पैदा होनेवाली खुदकुशी की प्रवृत्ति के रोकथाम पर काम करने की जरूरत है। सुसाइड को रोकने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के तौर पर करने की जरूरत है, ताकि समय पर ऐसे लोगों के बारे में पता कर सकें। उनकी काउंसलिंग करके उनकी जान बचा सकें। एम्स के फोरेंसिक विभाग के डॉक्टर चितरंजन बेहरा ने बताया कि देश की एक लाख आबादी में 10.5 लोग सुसाइड करते हैं। दिल्ली की बात करें तो अकेले एम्स में हर साल औसतन 500 से 600 सुसाइड के मामले आते हैं। उन्होंने कहा कि सबसे चिंता की बात यह है कि अधिकांश सुसाइड के मामले 20 से 40 साल की उम्र के होते हैं, जो उर्वर उम्र है। इस उम्र में मौत से देश का नुकसान होता है।

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