हरियाणा

अम्बाला की बेटी- सुषमा स्वराज ने बॉलीवुड को दिलवाया था इंडस्ट्री का दर्जा

चंडीगढ़ - गत रात्रि भारत की पूर्व विदेश मंत्री और भाजपा की वरिष्ठतम नेत्री सुषमा स्वराज का दिल का दौरा पड़ने से आकस्मिक निधन हो गया। सुषमा स्वराज वर्ष 1996 , 1998 और 2000 में केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री के पद पर रही और इसी दौरान उन्होंने हिंदी फिल्म जगत जिसे बॉलीवुड के नाम से जाना जाता है को एक इंडस्ट्री के रूप में दर्जा दिलवाने में अहम रोल अदा किया। फिल्मी सितारों और फिल्म निर्माताओं की कई दशकों से मांग थी कि फ़िल्म कारोबार को इंडस्ट्री का दर्जा जाय ताकि वह कानूनी रूप से फिल्म निर्माण के लिए बाज़ार या बैंको से ऋण प्राप्त कर सकें सकें और उन्हें पैसे के लिए अंडरवर्ल्ड के आगे हाथ न फैलाने पड़े। सुषमा वाजपेयी सरकार में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री भी रही जबकि नरेंद्र मोदी सरकार में उन्होंने विदेश मंत्री के रूप में उल्लेखनीय कार्य किया।इस वर्ष हुए आम चुनावो में उन्होंने हालांकि स्वास्थ्य कारणों से चुनाव नहीं लड़ा। गौरतलब है कि हरियाणा के अम्बाला कैंट विधानसभा क्षेत्र से उन्होंने मात्र साढ़े 25 वर्ष की आयु में अपने राजनीतिक जीवन का पहला चुनाव लड़ा और जीता एवं सबसे कम उम्र में तत्कालीन देवी लाल सरकार में प्रदेश की श्रम एवं रोज़गार विभाग की कैबिनेट मंत्री बनी। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने उनके विधायी और संसदीय जीवन से सम्बंधित आधिकारिक आंकड़ों का अध्ययन करने के बाद बताया कि सुषमा ने अक्टूबर, 1977 में हुए हरियाणा विधानसभा चुनावो में अम्बाला कैंट से जनता पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ 63 प्रतिशत वोट हासिल कर कांग्रेस के डीआर आनंद को करीब 9800 वोटो के अंतर से हराया।इसके बाद वर्ष 1982 में उन्होंने अगला विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा इसके पश्चात 1987 में हुए विधानसभा चुनावों में उन्होंने दोबारा यहाँ से चुनाव लड़ा और कांग्रेस के राम दास धमीजा को करीब आठ हज़ार वोटो से पराजित किया एवं प्रदेश सरकार में पहले शिक्षा एवं फिर खाद्य और आपूर्ति विभाग की मंत्री बनी। इसी बीच उन्होंने लगाकर तीन बार अर्थात वर्ष 1980 , 1984 और 1989 में हरियाणा की करनाल लोक सभा सीट से पहले जनता पार्टी और फिर भाजपा की टिकट पर चुनाव लड़ा परन्तु वह तीनों बार कांग्रेस के दिग्गज नेता चिरंजी लाल शर्मा से हार गयी। इसके बाद हालांकि वर्ष 1990 में उन्हें हरियाणा से राज्य सभा के लिए चुन कर संसद के ऊपरी सदन में भेज दिया गया जिस कारण उन्होंने अम्बाला कैंट के विधायक पद से त्यागपत्र दे दिया जिसके बाद यहाँ हुए उपचुनाव में वर्तमान विधायक और हरियाणा के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ इसमें विजय हासिल की। हेमंत ने बताया कि सुषमा वर्ष 1990 से 1996 तक हरियाणा से, वर्ष 2000 से 2006 तक उत्तराखंड से और 2006 से 2009 तक मध्य प्रदेश से राज्य सभा की तीन बार सांसद रही। इसी दौरान वर्ष 1998 में तत्कालीन बंसी लाल सरकार ने उनके पति स्वराज कौशल को भी हरियाणा से राज्य सभा के लिए भेजा।इस प्रकार वर्ष 2000 से 2004 तक सुषमा और उनके पति दोनों राज्य सभा के एक साथ सदस्य रहे। वर्ष 1996 और वर्ष 1998 में हुए लोक सभा आम चुनावो में उन्होंने दक्षिणी दिल्ली लोक सभा सीट से लगातार दो बार चुनाव लड़ा और जीती। हालांकि इसके बाद वर्ष 1999 में हुए लोक सभा आम चुनावो में वह कर्नाटक की बेल्लारी लोक सभा सीट से कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गाँधी से हार गयी. इसी बीच वह अक्टूबर, 1998 से दिसंबर, 1998 के बीच राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की मुख्यमंत्री भी रही और वहां हुए विधानसभा चुनावो से हौज़ ख़ास विधानसभा सीट से भी जीती हालांकि उन्होंने इसके बाद यह सीट छोड़ दी. इसके बाद मई, 2009 और मई, 2014 में सुषमा ने मध्य प्रदेश की विदिशा लोक सभा सीट से लगतार दो बार जीत हासिल की और दिसंबर, 2009 से मई, 2014 तक लोक सभा में विपक्ष की नेता भी रही। सुषमा वाजपेयी सरकार में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री भी रही जबकि नरेंद्र मोदी सरकार में उन्होंने विदेश मंत्री के रूप में उल्लेखनीय कार्य किया। हालांकि इस वर्ष हुए आम चुनावो में उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से चुनाव नहीं लड़ा।

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