राष्ट्रीय

सी.सी.डी के मालिक वी.जी. सिद्धार्था का यूं चले जाना

सी.सी.डी के मालिक वी.जी. सिद्धार्था का यूं चले जाना 
सी.सी.डी- कैफे डे की नींव रखने वाले वी.जी.सिद्धार्था का यूं दुनिया से चले जाना, दुख तो देता ही है, परन्तु जेहन में असंख्य प्रष्न भी पैदा करता हैं । जिबनेस स्टैंडर्ड अखबार ने उन्हें सादा जीवन, उच्च विचार वाले, अरबपति उद्यमी बताया है, न केवल उनके करीबी लोग उनके इस दुखांत पर उन्हें षिद्धत से याद कर रहे है, अपितु इस घटना ने कारोबारी जगत को हिला कर रख दिया है । कारपोरेट जगत में जहां, विजय माल्या, नीरव मोदी जैसे विलासिता पूर्ण जिंदगी जीने के बाद, आर्थिक कठिनाईयां जोकि उनके मूल्यविहीन तथा धोखाधड़ी करने तथा बैंकों का पैसा उड़ाकर, देष के बाहर पलायन कर जाते हैं, वहां मूल्यों पर जीने वाले सिद्धार्थ जैसे व्यक्ति दुनिया से यूं रूक्सत हो जाते है तो उनके मित्र, परिवार, सहयोगी उनके कर्मचारी सभी सकते में आ गये है । आउटलुक बिजनेस ने उन पर एक लेख छापा था, जिसमें उन्होंने भारत के पहले घरेलू काफी श्रृंखला, कैफे काफी के संस्थापक, चैयरमैन एवं प्रबंध निदेषक को मधुर, मृदुभाशी एवं चर्चा से दूर रहने वाला षख्स बताया है। हालंाकि वे पूर्व विदेषमंत्री व कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एस.एम. कृश्णा के दामाद थे, पर वे अपने दम पर, अपने बा्रंड के लिए ही जाने जाते थे । वे पैसे से अधिक महत्वपूर्ण नाम व प्रतिश्ठा को मानते थे तथा उन्हें अपनी पहचान सी.सी.डी सर्वोपरि थी । उन्हें इस बात का बहुत गर्व था कि उन्होंने 43000 से अधिक लोगों को रोजगार दिया है तथा वे सी सी डी को दुनिया की तीन अग्रणी काफी ब्रांड में पहुंचाने की मंषा जताते रहते थे । बिजनेस स्टैंडर्ड में उनपर छपे लेख में उन्हें साधारण पैंट षर्ट पहनने वाले तथा महंगी विदेषी गाड़ियों की अपेक्षा टयोटा इनोवा में ही सफर करना पसंद था । जानने वाले लोग बताते है कि अपनी बिजनैस मीटिंगस बड़े बड़े होटल्स जैसे कि ताज या ओबेराय की अपेक्षा अपनी सी सी डी कैफे में रखना पसंद करते थे । किसी कारोबारी यात्रा के दौरान होटल में ठहरने का खर्च बचाने के लिए वह अक्सर सुबह की उडान ले देर रात की उड़ान से वापिस आ जाते थे । उनकी खुदकुषी न केवल एक व्यक्ति की विफलता है जैसाकि उन्होंने कर्मचारियों तथा निदेषक मंडल को लिखे अंतिम पत्र में लिखा है कि‘‘ मैं उद्यमी के तौर पर विफल रहा और लोगों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा ‘‘ । यह पूरे कारोबारी जगत, समाज तथा देष में फैली हताषा बताती है। हालांकि उन्होंने पत्र में नकदी संकट तथा आयकर विभाग की ज्यादती का प्रष्न भी उठाया है, पर वित्तीय संकट के लिए अपने को तथा अपने व्यवसायिक निर्णयों में गल्ती मानी है । कर्जदाताओं के दबाव व वित्तीय बाजार में चल रही मंदी से वे निपट नहीं पाये । आखिर वो उद्योगपति जो नियम व कायदे के अनुसार चलते हैं, मूल्य आधारित निर्णय लेते हैं, उन्हें जीवन का अंत क्यूं इस तरह से करना पड़ता है । उनके जाने के बाद जहां दलाल पथ - स्टाक मार्किट- मंदड़ियों की गिरफत में आ गयी है, उनके षेयर निरंतर गिर रहे है, कर्मचारियों व जुड़े व्यापारियों में हड़कंप मच गया है, आर्थिक जगत से जुड़ी हस्तियां दुख व षोक से भरे ब्यान दे रहे हैं, लेकिन उनकी जिस तरह के आर्थिक समाज व कारोबारी जगत में हम रह रहे हैं. उस पर कई सवालियां निषान लगा रही है । कोई उन्हें अपनी अन्तर आत्मा की आवाज सुनने वाले दुलर्भ कारोबारी बता रहे हैं, तो कोई उन्हें ‘‘ मजबूत इरादे वाले इंसान तो माने जा सकते हैं, लेकिन मोटी चमड़ी वाले वे नहीं थे ‘‘। उनके लापता होने पर उनके द्वारा लिखे गये पत्र को उनकी सत्यता पर आषंका जता रहे थे, पर उनके करीबी व सहयोगी रहे टी वी मोहन दास पाई ने कहा कि ये पत्र वहीं लिख सकते हैं । ऐसा कोई दूसरा लिख हीं नहीं सकता तथा उन्होंने इस पर अपनी राय रखते  हुए कहा कि ‘‘ समाज व देष में उद्योगपतियों को जैसा व्यवहार मिलता है, वह परिवर्तित होना चाहिए । टैक्स अधिकारियों द्वारा ‘‘ कर की चोरी‘ को ‘‘विवाद‘‘ माना जाना चाहिए न कि वास्तव में ‘‘चोर या अपराधी‘‘ जैसे कि प्रवृत्ति बन गयी है । भारत में चाहे व्यवसाय करने की सहुलियत - ईज आफ डूईंग बिजनेस - में अन्तरराश्टीय स्तर पर अच्छी रैंकिग ले रहा है, उसमें कितना सुधार हो रहा है, यह इस घटना से स्पश्ट होता है । देष में सबसे बड़ी काफी श्रृंखला सी सी डी-1752 कैफे आउटलेट के मालिक का यूं चले जाना, देष के लिए आंखे खोल जागने का वक्त है । काफी उगाने वाले के बेटे, जिसने कहा था कि अगर वह अपने पैतृक व्यवसाय में लगे रहते तो 21 वर्श में ही रिटायर हो जाते, पर उसी व्यवसाय को नई दिषा दे, रूपातरण कर 60 वर्श के होते होते, रिटायर होने की उम्र तक इस दुनिया से कूच कर गये । अंत में ‘‘ सांसों के साथ चल रहा था अकेला, सांसे गयी तो सब साथ चल पड़े ‘‘
                                                             डा0 क. कलि 
कुछ कहना है? अपनी टिप्पणी पोस्ट करें
tatkalnews.com
AAR ESS Media
newstatkal@gmail.com
tatkalnews181@gmail.com
Visitor's Counter : 96237140
Copyright © 2016 AAR ESS Media, All rights reserved.
Desktop Version