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IAS की ट्रेनिंग में अब किताबी ज्ञान कम, फील्ड में मेहनत पर फोकस-ट्रेनिंग में बदलाव को सरकार की सहमति, अगले बैच से लागू होने की उम्मीद

 COURTESY NBT JULY 22

ट्रेनिंग में बदलाव को सरकार की सहमति, अगले बैच से लागू होने की उम्मीद
Narendra.Mishra@timesgroup.com


•नई दिल्ली: आईएएस अधिकारियों को अब ट्रेनिंग के दौरान कमरे के अंदर किताबी ज्ञान में कम वक्त बिताना होगा। उन्हें फील्ड खासकर सुदूर क्षेत्रों में अधिक वक्त देकर व्यावहारिक अनुभव से गुजरना होगा। महीनों से लंबित प्रस्ताव पर अब केंद्र सरकार ने सहमति दी है। सूत्रों का कहना है कि अगले साल नए बैच से इसे लागू भी कर दिया जाएगा। नए प्रस्ताव के तहत ट्रेनिंग अवधि को अधिकतम एक साल कर दिया जाएगा ताकि गांव में अधिकारियों को ट्रेनिंग में बिताने का अधिक वक्त मिले।

इसके लिए मौजूदा फाउंडेशन कोर्स के सिलेबस में बदलाव होगा, जिससे नए सिलेबस में प्रासंगिक विषयों पर अधिक फोकस हो सके। इसके तहत सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक व्यवस्था के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी। सूत्रों के मुताबिक इन सभी प्रस्तावों को हरी झंडी दे दी गई है। एक प्रस्ताव यह भी था कि ट्रेनिंग के दौरान कम से कम दो परीक्षाएं हों। लेकिन इस प्रस्ताव को अभी मंजूरी नहीं मिली है। गौरतलब है कि अभी जिन्हें आईएएस कैडर मिलता है उन्हें लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में ट्रेनिंग दी जाती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले साल वहां एक रात रुके भी थे।

मालूम हो कि मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद सिविल सेवाओं की ट्रेनिंग में कई अहम बदलाव किए हैं। 2015 में नए आईएएस अधिकारियों को ट्रेनिंग के दौरान केंद्र में तीन महीने बतौर असिस्टेंट सेक्रेटरी के रूप में ट्रेनिंग करना अनिवार्य कर दिया था, जिससे वे केंद्रीय योजनाओं और उनके क्रियान्वयन के बारे में नजदीक से जान सकें।

प्राइवेट कंपनियों में डेप्युटेशन का प्रस्ताव खारिज

सरकार ने एक संसदीय कमिटी के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है जिसमें अनुशंसा की गई थी कि आईएएस अधिकारियों को प्राइवेट कंपनियों में काम करने (डेप्युटेशन पर) भेजा जाए। सूत्रों के अनुसार सरकार का मत है कि इससे व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

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