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जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रम का हाल : शारीरिक कमजोरी और वैवाहिक जीवन प्रभावित न हो, इस मिथक के चलते पुरुष नहीं कराना चाहते नसबंदी


COURTESY DAINIK BHASKAR JULY 22

पुरुष नसबंदी सिर्फ 2 फीसदी, फैमिली प्लानिंग का 98 फीसदी जिम्मा महिलाओं पर
जनसंख्या नियंत्रण कार्यक्रम का हाल : शारीरिक कमजोरी और वैवाहिक जीवन प्रभावित न हो, इस मिथक के चलते पुरुष नहीं कराना चाहते नसबंदी

जनसंख्या नियंत्रण को लेकर केंद्र सरकार व राज्य सरकार की ओर से चलाए जा रहे कार्यक्रम व योजनाओं के बाद भी महिलाओं की तुलना में पुरुष नसबंदी के पानीपत जिले के सरकारी आंकड़े शर्मनाक हैं। सरकार की ओर से प्रोत्साहन राशि देने के बावजूद परिवार नियोजन में पुरुषों की भागीदारी न के बराबर है। साल 2017 से अब तक 25 हजार से ज्यादा महिलाअाें ने नलबंदी करवाई है, वहीं पुरुषों की नसबंदी का अांकड़ा 200 भी पार नहीं हुअा है। आकड़ों के अनुसार नसबंदी कराने वाले पुरुष महज एक से दो फीसदी हैं। परिवार नियोजन में 98 फीसदी महिलाओं का हाथ है। पुरुष नसबंदी में पिछड़ने का प्रमुख कारण कमजोरी आने और वैवाहिक जीवन प्रभावित होने जैसे मिथक हंै।
महज पानीपत का है ये हाल, महिलाएं झेल रहीं पुरुषों के हिस्से का भी दर्द
सबसे बड़ा कारण ये है...
छाेटा परिवार-सुखी परिवार को प्राथमिकता देने में और जनसंख्या काे नियंत्रण करने के लिए केंद्र और सरकार की ओर से महिलाअाें की नलबंदी व पुरुषों की नसबंदी का कार्यक्रम चलाया जाता है, लेकिन जिन उद्देश्यों से यह कार्यक्रम चल रहा है, पूरा नहीं हाे रहा है। नसबंदी कार्यक्रम का लक्ष्य हम दाे हमारे दाे, के नारे के साथ चलाया जाता है। लेकिन अांकड़े देखें जाएं ताे 55 % नलबंदी व नसबंदी 3 बच्चों के बाद हाे रही है। वहीं 14% लाेग एेसे भी हैं जाे 4 या इससे अधिक बच्चे हाेने पर ही नसबंदी करवाते हैं। केवल 30 फीसदी ने ही दाे बच्चों के बाद नसबंदी कराई है। पुरुष नसबंदी करवाने पर 2000 रुपए दिए जाते है जाेकी महिलाअाें के 1400 के मुकाबले भी 600 रुपए ज्यादा है। किसी भी साल पुरुषों की नसबंदी का आंकड़ा 100 नहीं पहुंचा
लक्ष्य: हम 2 हमारे 2, लेकिन 55% नसबंदी 3 बच्चाें के बाद
पुरुष
28 से 32 उम्र के बीच 70%
33 से 45 के बीच 30%
20 से 26 के बीच काेई नहीं
2017 से अप्रैल 2019 तक सिर्फ 135 पुरुषाें ने कराई नसबंदी
2017-2018 में 1828 महिलाअाें ने नलबंदी करवाई।
डिलीवरी के बाद 3900 अाॅपरेशन हुए।
अलग-अलग तरह से 8513 महिलाअाें की नलबंदी हुई।
2017-2018 में सिर्फ 68 पुरुषाें ने नसबंदी करवाई।
2018-2019 में 1922 महिलाअाें ने नलबंदी करवाई।
65 पुरुषों की नसबंदी। डिलीवरी 4 हजार की नलबंदी।
महिलाएं
2 बच्चाें के बाद 30%
3 बच्चाें के बाद 55%
चार बच्चे या उससे ज्यादा के बाद 14%
1 बच्चे के बाद 01%
नसबंदी फेल हुई तो मुआवजा...
पुरुष नसबंदी करवाने पर 2000 रुपए प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है।
महिलाअाें काे नलबंदी करवाने पर 1400 रुपए प्राेत्साहन राशि देने का प्रावधान है।
विशेष शिविर के दौरान नसबंदी करवाने पर उपहार दिया जाता है।
पुरुष या महिला की नसबंदी फेल होने पर 30 हजार रुपए मुआवजे की व्यवस्था है।
ऑपरेशन के दौरान मौत होने पर 2 लाख रुपए देने का भी प्रावधान है।
मानसिकता में बदलाव लाना जरूरी: गोयल
पति को अपनी पत्नी का ही ऑपरेशन कराने में ज्यादा विश्वास है। ग्राफ बढ़ाने के लिए हर माह के पुरुष नसबंदी के लिए विभाग द्वारा जागरूक भी किया जाता है। साथ

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