हरियाणा

HARYANA-आईएएस से मंत्रीजी की खीज

COURTESY DAINIK BHASKAR JULY 22

नो मििनस्टर
छियालिस मांगों की सूची का नहीं चला काका का दाव
विधानसभा चुनाव से पहले काका सभी रूठों को मनाने में जुटे हैं। इसी क्रम में कर्मचारियों की तरफ हाथ बढ़ाया है। एक दिन पहले ही मैराथन बैठक कर इन्हें मनाने का खूब प्रयास हुआ। पहला ही दाव 46 मांगों को पूरा करने की सूची पढ़कर लगाया गया, लेकिन कर्मचारी कहां मानने वाले थे। छह घंटे की बैठक के बाद भी आंदोलन की घोषणा कर दी है। अब देखना यह है कि काका इन आंदोलनों से कैसे निपटेंगे। सियासतदान कह रहे हैं कि कर्मचारियों के वोट तो जहां जाने हैं, वहीं जाएंगे, चाहे कोई भी पार्टी कुछ भी कर ले।
अकेले-अकेले बिल्लु भाई
बिल्लु भाई अब अकेले होते जा रहे हैं। साथियों का साथ छूट रहा है। वे संगठन की मजबूती के लिए पूरा प्रदेश नाप रहे हैं और उनके मजबूत साथी उनका हाथ छोड़ रहे हैं। मनाने की कोशिश तो हालांकि ज्यादा नहीं हो रही, लेकिन इनेलो में मंच पर बैठने वाले नेताओं की संख्या लगातार कम हो रही है। जाने वालों का कारवां बढ़ता रहा है। अब देखना यह है कि तीन महीने बाद होने वाले विधानसभा चुनाव में कितने लोग बिल्लुभाई के साथ रहते हैं। क्योंकि दशकों से पार्टी में रहे वरिष्ठ नेताओं की भी पार्टी छोड़ने की अटकलें तेज हो चुकी है।
कांग्रेस में सन्नाटा
लगातार एक दशक तक राज करने वाली राष्ट्रीय पार्टी कांग्रेस में इस समय पुरी तरह सन्नाटा पसरा है। यूपी में प्रियंका सक्रिय है। अभी वहां चुनाव भी नहीं है। हरियाणा में इसके उलट हो रहा है। चुनाव जल्द होने वाले हैं, लेकिन यहां नेता अपने-अपने घरों तक सिमट गए हैं। जहां गुटों का नेतृत्व करने वाले दिल्ली की तरफ देख रहे हैं तो टिकट के दावेदार अपने आलाकमान की ओर नजर गड़ाए हुए हैं। लेकिन सक्रिय कोई नहीं है।
आईएएस से मंत्रीजी की खीज
पोस्ट मेट्रिक स्कॉलरशिप घोटाले के खुलासे में महकमे के मंत्री अफसरों को श्रेय नहीं देना चाहते। क्योंकि जिस आईएएस अफसर ने खुलासा कर कार्यवाही की प्रक्रिया शुरू की तो उसका तबादला ही कर दिया। जिससे उनकी खीज बनी हुई है। अब मंत्री, उस आईएएस अफसर का नाम भी जुबान पर नहीं लाना चाह रहे। पिछले दिनों बोले-यह तो पहले के अफसरों और सिस्टम ने गड़बड़ी पकड़ी थी। एक अफसर का दो दिन पहले ही तबादला हो गया था। इसलिए किसी को श्रेय नहीं दे सकता।
ट्वीट वाले नेताजी
भले ही जनता के बीच रहकर ही सक्रिय राजनीति की जाती है, लेकिन कुछ ट्वीट वाले नेता बन गए हैं। कांग्रेस में भी एक नेताजी अक्सर दिल्ली ही रहते हैं, लेकिन ट्वीट करने से नहीं चूकते। वह इस ट्वीट से कितने लोगों तक पहुंच पाते हैं, यह तो वही जानें। लेकिन केंद्र से लेकर प्रदेश की हर छोटी-बड़ी घटना पर इनका ट्वीट जरूर आ जाता है। अब विधानसभा चुनाव करीब हैं तो ट्वीट और ज्यादा बढ़ गए हैं।
सरकार के चुनावी यू-टर्न
विधानसभा चुनाव सिर पर है। ऐसे में भाजपा वापसी का दम ठाेक रही है। इसलिए अब कहीं भी जनता नाराज होती दिखती है तो चुनावी यू-टर्न ले लिया जाता है। कॉलेजों में फीस बढ़ा दी गई। जब विरोध शुरू हुआ तो फैसला वापस हो गया। वर्षों से परेशान बुजुर्गों की पेंशन के लिए एसएलसी मान ली गई। जबकि यही बुजुर्गों लंबे समय से पेंशन से वंचित रहे। लेकिन अब वोट की दरकार है तो यू-टर्न लेने में कैसे हिचक।
-ओएसडी

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