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रानियां विधायक ने भी छोड़ी पार्टी, इनेलो के गढ़ सिरसा में सिर्फ अभय और सिंगला ही बचे, जींद साफ

COURTESY DAINIK BHASKAR JULY 22

रानियां विधायक ने भी छोड़ी पार्टी, इनेलो के गढ़ सिरसा में सिर्फ अभय और सिंगला ही बचे, जींद साफ
बिखरती इनेलो : परिवार में कलह के बाद से लगातार साथ छोड़ रहे पार्टी विधायक
मनोज कुमार | राजधानी हरियाणा
इनेलो के एक और विधायक रामचंद्र कंबोज ने पार्टी छोड़ दी है। वे 30 साल से पार्टी के साथ जुड़े हुए थे। बड़ी बात यह है कि उन्होंने अपने इस्तीफे में सिर्फ देवीलाल के त्याग और नीतियों का वर्णन किया है। न तो ओमप्रकाश चौटाला और न ही अभय चौटाला का कहीं जिक्र किया। यह भी लिखा कि देवीलाल त्याग मूर्ति थे, लेकिन अब परिवार में मुख्यमंत्री पद लेकर कलह हुई। उनके इस्तीफे की शैली को लेकर भी सियासी हलकों में अलग-अलग मायने निकाले जा रहे हैं।
इधर, 2014 के विधानसभा चुनाव में 19 विधायकों के साथ दूसरे नंबर की पार्टी बनी इनेलो में अब उसके साथ अभय चौटाला समेत 4 विधायक रह गए हैं। जबकि इनेलो के गढ़ सिरसा में अभय के साथ मक्खन लाल सिंगला ही बचे हैं। वहीं, जींद भी इनेलो का गढ़ था, यहां इनका कोई विधायक नहीं बचा। कागजों में 11 विधायक जरूर हैं, लेकिन 4 नैना चौटाला, पिरथी नंबरदार, अनूप धानक और राजदीप फौगाट बागी होकर दुष्यंत का समर्थन कर रहे हैं, जबकि नसीम अहमद कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं। नगेंद्र भड़ाना भाजपा की नीतियों का समर्थन करते रहे हैं। पार्टी को अब सिरसा जिले के रानियां से विधायक रामचंद्र कंबोज ने बड़ा झटका दिया है। उन्होंने पार्टी प्रदेशाध्यक्ष बीडी ढालिया को इस्तीफा भेज दिया है, जिसमें उन्होंने पार्टी के सभी पदों से त्याग पत्र देने की बात लिखी है। त्याग पत्र देने की वजह परिवार में हुई अंतरकलह के बाद पार्टी के कमजोर हाेना बताया है। उन्होंने कहा कि वे जल्द ही विधानसभा की सदस्यता से भी इस्तीफा देंगे। किस पार्टी में जाएंगे, यह अभी तय नहीं है। हालांकि कयास उनके भाजपा में जाने के ही लगाए जा रहे हैं।
प्रदेशाध्यक्ष ने नेताओं के लगातार पार्टी छोड़ने पर कहा-ये टिकट के दावेदार जा रहे हैं। वर्कर पार्टी के साथ है। कुछ लोगों को सत्ता का सुख चाहिए। इधर, सूत्रों का कहना है कि कुछ और विधायक भी जाने की तैयारी में है। दो विधायकों का भाजपा नेताओं से संपर्क चल रहा है।
19 विधायकों में से कागजों में बचे सिर्फ 11, इनमें भी 4 बागी और एक कांग्रेस में गया, एक भाजपा का कर रहा समर्थन
30 साल से पार्टी से जुड़े कंबोज ने इस्तीफे में लिखा-देवीलाल ने त्याग किया, अब परिवार में सीएम पद की लालसा से पार्टी हुई कमजोर
विधायक कंबोज ने लिखा है कि वे 30 साल चौधरी देवीलाल की नीतियों से प्रभावित होकर इनेलो से जुड़े हुए हैं। कुछ महीने से पार्टी में हुई अंतरकलह से मैं बहुत दुखी और परेशान हूं। देवीलाल त्याग की मूर्ति थे और जिन्होंने सत्ता का लोभ न करके प्रधानमंत्री पद को भी त्याग दिया था, लेकिन आज उसी परिवार मे मुख्यमंत्री पद को लेकर आपसी कलह हुई, जिसके कारण पार्टी को काफी नुकसान हुआ है। इस हालात के कारण अब मैं पार्टी के लिए कार्य करने में असमर्थ हूं और बहुत दिनों से इन हालातों के कारण विचलित हूं। इन परिस्थिति को देखते हुए बहुत दुखी व भारी मन से मैं पार्टी के तमाम पदों से इस्तीफा देता हूं। मेरा इस्तीफा मंजूर किया जाए। हालांकि उन्होंने अभी यह खुलासा नहीं किया कि वे किस पार्टी को जॉइन करेंगे।
शिकायतकर्ता भी गए
फतेहाबाद के विधायक रहते दौलतपुरिया ने 4 विधायकों पर जजपा का समर्थन करने का आरोप लगाते हुए सदस्यता खत्म करने की शिकायत की थी। बाद में दौलतपुरिया खुद भाजपा में चले गए। कुछ दिन पहले ही रामचंद्र कंबोज ने विधायक नसीम के कांग्रेस में शामिल होने पर शिकायत की। अब उन्होंने भी पार्टी छोड़ दी है।
जींद उपचुनाव से पहले झटके लगने शुरू
जींद उपचुनाव से पहले झटके लगने लगे थे। विधायक हरिचंद मिड्‌ढा के निधन के बाद उनके बेटे कृष्ण भाजपा में चले गए। इसके बाद रणबीर गंगवा, केहर रावत, बलवान दौलतपुरिया, परमिंद्र ढुल व जाकिर हुसैन भाजपा में चले गए। विधायक जसविंद्र संधू का निधन हो गया। अब कंबाेज ने पार्टी छोड़ दी है। 4 विधायक बागी हैं। पांच में नगेंद्र भड़ाना भाजपा का समर्थन कर रहे हैं। अब इनेलो में अभय के साथ मक्खन लाल सिंगला, रतिया से रविंद्र बलियाला, बरवाला से वेद नारंग और लोहारू से ओमप्रकाश बारवा ही बचे हैं।

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