हरियाणा

FARIDABAD-कुत्ते के काटे 200 लोग डेली आते हैं बीके में, दो माह से एंटी रैबीज वैक्सीन नहीं, मरीज बाजार से 250 का इंजेक्शन 350 में खरीद कर लगवा रहे

COURTESY DAINIK BHASKAR JULY 21

कुत्ते के काटे 200 लोग डेली आते हैं बीके में, दो माह से एंटी रैबीज वैक्सीन नहीं, मरीज बाजार से 250 का इंजेक्शन 350 में खरीद कर लगवा रहे
व्यवस्था पर सवाल : स्वास्थ्य अधिकारी कह रहे सप्लाई कम है, बाहर भी बढ़ी िकल्लत, इससे कालाबाजारी तेज हो गई है

कुत्तों और बंदरों के काटने से रैबीज इंफेक्शन से बचाने वाली एंटी रैबीज वैक्सीन का स्टॉक बीके अस्पताल में 20 मई से खत्म है। निजी मेडिकल स्टोरों और ड्रग एजेंसियों पर भी यह आसानी से उपलब्ध नहीं है। जिनके पास वैक्सीन हैं वे इसे ब्लैक में 350 रुपए में बेच रहे हैं। बीके अस्पताल में बंदर व कुत्ते के काटने से करीब 200 से अधिक मरीज रोज आते हैं। इन पीड़ितों को 20 मई से ब्लैक में एंटी रैबीज वैक्सीन खरीदना पड़ रही है। सिविल अस्पताल में सामान्य वर्ग से 100 रुपए लिए जाते हैं और गरीब एवं एससी वर्ग को निशुल्क एंटी रैबीज वैक्सीन लगाई जाती है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि वह वैक्सीन के लिए लगातार हेडक्वार्टर रिमाइंडर भेज रहे हैं। वेयरहाउस में दवा कंपनियां माल सप्लाई नहीं कर रही हैं। इससे यह दिक्कत पैदा हुई है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह हालात प्रदेशभर में हैं।
हालात: मरीज कई जगहं भटकते हैं तब मिलती है वैक्सीन
भारत नगर निवासी जगदीश के अनुसार उन्हें कुत्ते ने काट लिया। वे बीके अस्पताल में इंजेक्शन लगवाने पहुंचे। वहां करीब एक घंटे लाइन में लगने के बाद पता चला कि यहां दवाई ही नहीं है। शहर में करीब 10 मेडिकल की दुकानों में दौड़े तो एक ने वैक्सीन दी। इसके बदले में उनसे 350 रुपए लिए गए। बीके अस्पताल में 20 मई से रोज 200 मरीज इस तरह की परेशानी भुगत रहे हैं। पल्ला निवासी राहुल के अनुसार वह इस उम्मीद के साथ बीके पहुंचते थे कि यहां उन्हें एंटी रैबीज वैक्सीन मिल जाएगी। उन्हें यहां नहीं िमली। बाजार में भी काफी मेडिकल स्टोरों पर भटकने के बाद यह बड़ी मुश्किल से मिली है। यही बात एसजीएम नगर निवासी आकाश ने कही। उनका कहना था कि उन्हें बीके में वैक्सीन नहीं होने की जानकारी थी। इसलिए उन्होंने एसजीएम नगर और एनआईटी-5 की दुकानों पर इसे खोजा, एक जगह िमली, वहीं से लेकर वे यहां इंजेक्शन लगवाने आए हैं।
बीके में बाहर से वैक्सीन खरीदकर लगवाते जगदीश।
फायदा उठा रहे मेडिकल वाले
दवा कंपनियों ने करीब एक साल पहले से ही वैक्सीन की सप्लाई में कटौती कर दी थी। दो माह से यह पूरी बंद है। केमिस्टों और ड्रग एजेंसी संचालक वैक्सीन को स्टोर कर रहे थे। अब इसका फायदा उठाकर कुछ केमिस्ट वैक्सीन की ब्लैक मार्केटिंग कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है।
एंटी रैबीज वैक्सीन गुड़गांव स्थित वेयरहाउस से नहीं मिल रही है। वहां भी यह दवाई नहीं है। जहां तक मुझे पता है, दवाई बनाने वाली कंपनी ने इसकी सप्लाई कम कर दी है। इससे अस्पतालों में इसकी कमी हो गई है। हालांकि दवाई के लिए कई बार अनुरोध किया गया है। लेकिन यह उपलब्ध नहीं हो पा रही है। -डॉ. सविता यादव, पीएमओ, बीके अस्पताल
रोज चाहिए 200 वैक्सीन
बीके अस्पताल में बंदर व कुत्तों के काटने के रोज 200 के आसपास मरीज पहुंचते हैं। यहां 200 वैक्सीन रोज चाहिए। 12 मई को करीब 1200 वैक्सीन अस्पताल आई थीं। जो 20 मई तक खत्म हो गई थीं। इसके बाद से एक भी वैक्सीन नहीं है। हर माह यहां 2000 से ज्यादा वैक्सीन की जरूरत पड़ती

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