हरियाणा

जल शक्ति अभियान के तहत बड़ा तालाब व सोलहराही तालाब का किया जाएगा जीर्णोद्धार, भरा जायेगा पानी-डीसी

उपायुक्त यशेन्द्र सिंह ने कहा कि पीतल नगरी के नाम से देश-विदेश में विक्चयात रेवाड़ी नगरी की ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण करना हम सबका कर्तव्य है। हमें जिले की ऐतिहासिक धरोहरों को संजोकर रखने में अपना योगदान देना चाहिए।
श्री सिंह आज रेवाड़ी के ऐतिहासिक बड़ा तालाब का निरीक्षण करते हुए बताया कि बड़ा तालाब को राव तेज सिंह ने वर्ष 1810-1815 के दौरान बनवाया था, इसलिए इसे राव तेज सिंह तालाब के नाम से भी जाना जाता है। तालाब रेवाड़ी के पुराने टाउन हॉल के पास स्थित है। उल्लेखनीय है कि भगवान हनुमान का एक मंदिर बड़ा तालाब के किनारे स्थित है जो लोगों की अस्था का केन्द्र है। उन्होंने बताया कि ऐतिहासिक धरोहरों से जिले को अलग पहचान मिली हुई है।
डीसी ने बताया कि जल शक्ति अभियान के तहत बड़ा तालाब व सोलहराही तालाब का जीर्णोद्धार किया जाएगा और इनमे पानी भरा जायेगा! उन्होंने तेज सरोवर के शौचालय की साफ सफाई करने के भी निर्देश दिए
उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए चिंतित हैं। जिले की ऐतिहासिक धरोहरों का चरणबद्ध जीर्णोद्धार कराया जाएगा, जिससे यथाशीघ्र इनकी बदहाली दूर की जाएगी। श्री सिंह ने नगर परिषद के अधिकारियों को निर्देश दिए कि बड़ा तालाब की जल्द से जल्द करवाएं। उन्होंने
इसके उपरांत उन्होंने सोलहराही तालाब का भी निरीक्षण किया और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस तालाब में जो मिट्टी व गारबेज भरा हुआ है उसे साफ करवाने के लिए असटिमेट बनाकर उन्हें भेजा जाए ताकि सोलहराही तालाब जो कि ऐतिहासिक है इसको ठीक किया जा सके। उन्होंने इस सोलहराही तालाब के इतिहास की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि बरसाती पानी संग्रहण के लिए शहरों में सरकारी भवन, सार्वजनिक भवन, व्यवसायिक-औद्योगिक भवनों में व्यवस्था की जाए और जहां बरसाती जल संग्रहण के लिए ढांचा निष्क्रिय पडा है, उसका सुचारू संचालन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने शहरी क्षेत्र में जलाशय, तालाब, झील आदि से प्राथमिकता आधार पर अतिक्रमण हटाने, गंदे पानी का जलाशय में गिरना प्रतिबंधित करते हुए उसकी खुदाई करना सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
उल्लेखनीय है कि मुगल साम्राज्य की दास्तान का मूक गवाह रहा यह तालाब उस समय सामूहिक प्रयासों से चंदा इकट्टठा करके बनवाया था। उस समय इस तालाब का निर्माण प्रसिद्ध समाजसेवी गंगाराम भगत की देखरेख में करवाया गया था। रूद्रसिंह नामक एक व्यक्ति का भी इस सरोवर के निर्माण में विशेष योगदान रहा था। आस समय सोलहराही के पास सोलह मार्ग आकर मिलते थे, इसलिए इस सरोवर का नाम सोलहराही पड़ गया। सोलह रास्तों के मिलान पर ढलान में स्थित इस सरोवर को शुरू से ही सोलहराही के नाम से जाना जाता है। बुजुर्गो का कहना है कि शहर का पानी खारा था, इसलिए पहले लोग सोलहराही सरोवर के पास स्थित कुओं से ही पीने का पानी लाते थे।
इस अवसर पर एडीसी प्रदीप दहिया, नगर परिषद ईओ मनोज यादव सहित अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे।

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