हरियाणा

राज्य मंत्री कटारिया के मंत्रालय की भी कैबिनेट मंत्री भी रह चुकी हैं शैलजा - हेमंत

अम्बाला शहर - बीते माह 30 मई को मोदी सरकार के दूसरे शपथ ग्रहण समारोह में केंद्र में राज्य मंत्री के तौर पर शामिल किये अम्बाला (आरक्षित) लोक सभा सीट से तीसरी बार निर्वाचित सांसद रतन लाल कटारिया, जिन्होंने इस बार कांग्रेस की वरिष्ठ नेत्री कुमारी शैलजा को 3 लाख 42 हज़ार के अधिक के विशाल अंतर से हराया है, उन्हें दो मंत्रालयों में राज्य मंत्री बनने का अवसर मिला है. सामाजिक न्याय और अधिकारिकता मंत्रालय, जिसके कैबिनेट मंत्री थावर चंद गहलोत हैं और इसके अलावा नए सृजित किये गए जल-शक्ति मंत्रालय, जिसके मुखिया कैबिनेट मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत होंगे, इन दोनों मंत्रालयों में कटारिया उक्त दोनों कैबिनेट मंत्रियो के नीचे कार्य करेंगे. शहर निवासी हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने बताया कि जहाँ तक अम्बाला लोक सीट से निर्वाचित सांसदों को केंद्रीय मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व देने का प्रश्न है, तो वर्ष 1952 में पहली लोक सभा गठित होने के 44 वर्ष पश्चात अर्थात मई, 1996 में अम्बाला से चौथी बार सांसद बने भाजपा के सूरज भान को केंद्र में तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी की पहली भाजपा सरकार में केंद्रीय कृषि मंत्री अर्थात कैबिनेट रैंक का मंत्री बनाया गया था परन्तु यह सरकार 13 दिन में ही गिर गयी. हालांकि भान इसके बाद इसी लोक सभा के उपाध्यक्ष निर्वाचित हो गए. इसके बार फरवरी, 1998 में हुए लोक सभा चुनावो में सूरज भान बसपा के अमन कुमार नागरा से हार गए और इस कारण यह वाजपेयी की अगली 13 महीने की सरकार में मंत्री नहीं बन पाए. फिर 1999 लोक सभा चुनावो में उन्होने चुनाव नहीं लड़ा और अम्बाला से रतन लाल कटारिया पहली बार चुनाव जीते मगर उन्हें मंत्री नहीं बनाया गया. हेमंत ने बताया कि हालांकि वाजपेयी सरकार ने सूरज भान को पहले उत्तर प्रदेश, फिर हिमाचल प्रदेश का राज्यपाल और बाद में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति का चेयरमैन नियुक्त किया था एवं वह 2006 में अपने देहांत तक इसी पद पर रहे. हेमंत ने आगे बताया कि दूसरी ओर कोंग्रस की कुमारी शैलजा, जो अम्बाला सीट से लगातार दो लोक सभा चुनाव- 2004 और 2009 में जीतने से पहले सिरसा (आरक्षित) सीट से भी दो बार- 1991 और 1996 में सांसद रह चुकी है, वह वर्ष 1992 -95 में तत्कालीन कांग्रेस की नरसिम्हा राव सरकार में पहले केंद्रीय उप मंत्री और फिर 1995 -96 में मानव संसाधन मंत्रालय के शिक्षा विभाग में केंद्रीय राज्य मंत्री रही थी. इसके बाद मनमोहन सिंह की पहली यू.पी.ए.-1 सरकार में उन्हें वर्ष 2004 -2009 तक केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया. इसके बाद मई 2009 में यू.पी.ए. -2 सरकार के बनते ही उन्हें प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कैबिनेट रैंक का मंत्री बना दिया था. यही नहीं अक्टूबर, 2012 में उन्हें वर्तमान राज्य मंत्री कटारिया के एक मंत्रालय अर्थात सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय का कैबिनेट मंत्री भी बना दिया गया था जहाँ वह मई. 2014 तक रहीं. इस प्रकार शैलजा वर्ष 1991 से 2014 तक हर केंद्र में सत्तारूढ़ हर कांग्रेस सरकार में केंद्रीय मंत्री के हर पद - उप मंत्री, राज्य मंत्री, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं कैबिनेट मंत्री पर रह चुकी है. हेमंत ने बताया की वर्ष 1996 के बाद केंद्र में उप-मंत्री का पद समाप्त कर दिया गया था. वर्तमान में शैलजा हरियाणा से राज्य सभा की निर्वाचित सदस्य हैं एवं उनका छः वर्ष का कार्यकाल अगले वर्ष अप्रैल, 2020 तक है.

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