राष्ट्रीय

अरूण जेटली की सरकार से विदाई - अमितशाह की सरकार में शहनशाई

नई सरकार में एक तरफ अरूण जेटली जी विदा ले गये हैं तो दूसरी तरफ अमित अनिलचन्द्र शाह प्रवेश कर रहे हैं। पिछली सरकार में मोदी जी के बाद, सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण भूमिका में अरूण जेटली जी थे, जिनके पास दो भारी भरकम मंत्रालयों - वित्त तथा कारपोरेट अफेयर की कमान थी। उन्होंने स्वयं स्वेच्छा से स्वास्थ्य कारणों से सरकार में शामिल नहीं होने का मंतव्य जाहिर किया तथा उनके आग्रह करने पर उन्हें अब की बार जिम्मेदारी नहीं दी गई। लेकिन ये सभी जानते हैं कि अमित शाह, मोदी जी के लिये चाणक्य की भूमिका में हैं, पर अरूण जेटली ने मोदी जी को दिल्ली लाने, उन्हें लालकृष्ण आडवाणी को साईडलाइन कर भाजपा का नेता बनाने तथा उनको प्रधानमंत्री बनाने का प्रस्ताव उन्होंने रखा था। यही कारण है कि मोदी जी के पिछले कार्यकाल में (2014-19) उनकी सशक्त भूमिका रही तथा सबसे अहम विभाग उन्हें सौंपे गये। लुटियंस दिल्ली में भी गुजरात से आये मोदी को दिल्ली में जड़े जमाने में, अरूण जेटली जी का सहयोग सबसे अधिक रहा। अरूण जेटली व अमित शाह दोनों छात्र राजनीति से उभरे नेता हैं तथा जनसंघ की शाखा एबीवीपी के अपने काल में अध्यक्ष भी रहे हैं। अमित शाह मिट्टी पकड़ राजनेता हैं तथा मोदी के दायां हाथ रहे हैं। चाहे वे गुजरात में जब मुख्यमंत्री थे (2002-2014) तथा या केन्द्र में, पार्टी अध्यक्ष के रूप में उन्होंने शानदार काम किया। गुजरात में मोदी जी मुख्यमंत्री थे तो अमित शाह जी गृह मंत्री। अब वर्तमान सरकार में शामिल हो गये हैं तथा पार्टी में तो उन्हें मोदी के बाद नम्बर दो देखा ही जाता था, अब सरकार चलाने में ही उनकी भूमिका औपचारिक तौर पर सैकिंड लाईन आफ लीडरशिप उभर कर आयी है। मोदी और अमित शाह, दोनों ही शतरंज के माहिर खिलाड़ी हैं (चैस प्लेयर)। अब देखा यह जाना है कि सरकार में मिलकर दोनों कैसी पारी खेलते हैं। अमित शाह का राजनैतिक पटल पर उदय तथा उनका कैरियर ग्राफ इतनी तेजी से बड़ा है कि लोग दंग रह गये हैं। वे यूं ही भारतीय जनता पार्टी के चाणक्य नहीं कहे जाते, उनकी अध्यक्षता में पार्टी ने अपने ही बल पर बहुमत प्राप्त किया है तथा सर्वाधिक सीटें जीती हैं। उनके आदर्श भी यहीं है कि उनके कमरे में चाणक्य तथा वीर सावस्कर की बड़ी तस्वीर लटकी हुई है। वे अपने जुझारूपन तथा महत्वाकांक्षा के लिये जाने जाते हैं। कहते हैं कि मोदी व शाह न केवल चैबीस घण्टे राजनैतिक जीवन जीते हैं, अपितु राजनीति खाते, पीते व सूंघते हैं। अमित शाह डायबिटिक हैं तथा तीन बार इन्सूलीन लेने के साथ 16-18 घंटे पार्टी व राजनीतिक कार्यों में संलग्न रहते हैं। शाह गुजरात के वैष्णव नागर परिवार से सम्बन्ध रखते हैं तथा उनके पूर्वज मानसा राज्य के नगर सेठ थे। उन्होंने 13 वर्ष की उमर से राजनैतिक जीवन शुरू किया तथा सोहराबुद्वीन मर्डर केस में 29 दिन जेल में भी रहे। नई सरकार के गठन में शाह के शहनशाही प्रवेश पर राजनैतिक गुफ्तगु तथा चर्चा उनकी ओर ही केन्द्रित रही। सरकार गठन से पहले नरेन्द्र मोदी स्वयं अरूण जेटली जी से मिलने गये, उनकी विदाई तथा अब अमित शाह की मोदी सरकार में अगुवाई देश के लिये कैसा रंग खिलाती है, देखना बाकी है। अंत में अमित शाह जी के लिये पंक्तियां ‘‘वाकिफ कहां जमाना हमारी उड़ान से, वो और थे जो हार गये आसमान से’’।

 
डा0 क.कली
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