हरियाणा

हिसार पुलिस का अनोखा कारनामा

किसी भी घटना में पुलिस किस तरह से झूठी कहानी गढ़ती है और कई बार अपने ही बुने जाल में किस तरह से फंसती है इसका ताजा उदाहरण हिसार पुलिस में हुए एक घटनाक्रम में देखने को मिलता है। जिसमें पुलिस ने न्यायाधीश को भी कथित तौर पर गुमराह करके रिमांड पेपर पर पहले हस्ताक्षर करवा लिए और आरोपियों को बाद में गिरफ्तार किया। इस तरह की घटनाएं अक्सर फिल्मों में देखने को मिलती हैं लेकिन हिसार के सदर पुलिस थाना में हुई इस घटना के बाद बचाव पक्ष के वकीलों ने अदालत में याचिका दायर की और अब अदालत ने पुलिस ने नोटिस जारी कर दिया है।
 
पिछले छह दशक से वकालत कर रहे बचाव पक्ष के एडवोकेट वेदप्रकाश दुआ, एडवोकेट विपुल कुमार सैनी व पीडि़त कपिल ने आज यहां पत्रकारों से बातचीत में बताया कि कपिल देव रोहतक में कार सीट कवर आदि बनाने का काम करता है। पुलिस की कहानी के अनुसार पिछले साल दो व तीन जुलाई की मध्यरात्रि में कपिल देव, उसके साले सुरेंद्र, कपिल के दोस्त महाबीर, अन्य दोस्त संजय व संजय की पत्नी सुशील के विरूद्ध हिसार के सदर पुलिस थाने में भारतीय दंड संहिता की धारा 384/389 के तहत एफआईआर नंबर 621/2018 दर्ज की गई। यह मामला हनीट्रैप का था। जिसमें नरेश कुमार ने पुलिस को शिकायत दी थी कि सुशीला ने उसके भाई पवन कुमार पर दुष्कर्म का झूठा आरोप लगाकर पहले केस दर्ज करवाया और फिर समझौते के लिए 55 लाख रुपए की मांग की। नरेश कुमार ने जब नौ लाख रुपए की कथित समझौता राशि दी तो सदर थाने में तैनात एसआई मेवा रानी, एएसआई निजामुद्दीन व अन्य पुलिस पार्टी ने उसे रोहतक से गिरफ्तार कर लिया।
 
वकीलों ने पुलिस की इस कहानी को खारिज करते हुए कहा कि पुलिस ने अपने चालान में कहा है कि उन्होंने आरोपियों को दो व तीन जुलाई 2018 की मध्यरात्रि 1.15 बजे रोहतक से गिरफ्तार किया है, जबकि पुलिस ने रात 12.30 बजे माननीय न्यायाधीश के समक्ष पेश होकर रिमांड पेपर साइन करवा लिया। जिसमें यह साफ हो गया है कि पुलिस ने आरोपियों को पहले अदालत में पेश करके रिमांड पेपर साइन करवा लिए और बाद में गिरफ्तार किया।
 
वकीलों के अनुसार हिसार से रोहतक के बीच की दूरी 110 किलोमीटर है। पुलिस के दावे के अनुसार पुलिस ने 45 मिनट में जज से रिमांड पेपर भी साइन करवा लिए और रोहतक में जाकर छापा मारकर आरोपियों को गिरफ्तार करके हिसार आकर जेल भी भेज दिया।
 
बचाव पक्ष के वकीलों ने बताया कि नियमानुसार जब कोई नगदी बरामद की जाती है तो उस पर डयूटी मैजिस्ट्रेट के हस्ताक्षर जरूरी है। इस मामले में बरामद की गई नौ लाख रुपए की नगदी के किसी भी नोट पर डयूटी मैजिस्ट्रेट के हस्ताक्षर नहीं थे। जिसके चलते इतनी बड़ी धनराशि को केस प्रोपर्टी नहीं बनाया गया।  
 
वकीलों ने दावा किया कि पुलिस ने कपिल व अन्यों को दो जुलाई को दिन के समय रोहतक पुलिस को बगैर सूचित किए किसी अन्य मामले का हवाला देकर हिरासत में लिया था। पुलिस दो व तीन की मध्यरात्रि में रोहतक गई ही नहीं। पुलिस की इस पूरी कहानी को झूठी करार देते हुए वकीलों ने बताया कि डयूटी मैजिस्ट्रेट व पुलिस अधिकारियों की चालान में बताए गए समय की मोबाइल फोन की लोकेशन रोहतक की बजाए हिसार दिखाई जा रही है। जिससे यह साबित हो गया है कि जिस समय पुलिस ने यह सारा घटनाक्रम बताया है उस समय पुलिस रोहतक नहीं हिसार में थी, और उक्त सभी व्यक्तियों को एक साजिश के तहत फंसाया गया है।
 
इस मामले में अब बचाव पक्ष के वकीलों ने सीआरपीसी की धारा 173-8 के तहत हिसार के माननीय एसीजेएम मनप्रीत सिंह की अदालत में याचिका दायर की है। जिन्होंने सबूतों के आधार पर इस याचिका को स्वीकार करते हुए हिसार पुलिस को 24 जनवरी के लिए नोटिस जारी कर लिया है। वकीलोंने दावा किया कि पुलिस ने एक साजिश के तहत कपिल व अन्यों को फंसाया है। इस मामले में पुलिस अपने बुने हुए जाल में पूरी तरह से फंस चुकी है। अब बचाव पक्ष पर समझौते के लिए दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पीडि़तों को इंसाफ दिलवाने के लिए इस मामले में हर संभव लड़ाई लड़ी जाएगी।
 
इसी में बाक्स---
 
हिसार में 32 साल बाद दायर हुई ऐसी याचिका
 
हिसार के अदालती इतिहास में इस तरह की याचिका 32 साल बाद दायर की गई है। वकीलों के अनुसार हिसार में लंबे समय से इस तरह की कोई याचिका दायर नहीं की गई है जिसमें पुलिस की कार्रवाई को कटघरे में खड़ा किया गया है। करीब 32 साल पहले हिसार की अदालत में याचिका दायर की गई थी।
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