हरियाणा

औरत का सम्मान करें - डा. केपी सिंह

मधूबन-18 जनवरी - औरत को प्यार करो और सम्मान दो, उसमें बेबसी ढंूढने की बजाय, शक्ति, प्रेरणा तथा मानसिक नैतिकता ढंूढने का प्रयास करो, अपने को स्त्री से श्रेष्ठ होने के सारे विचार निकाल दों क्योंकि तुम उससे श्रेष्ठ नहीं हो। दार्शनिक जोजेफ मजिनी के इस कथन हरियाणा मानवाधिकारा आयोग के महानिदेशक डा. केपी सिंह ने आज अकादमी में एक प्रशिक्षण कार्यक्रम में उदृत करते हुए पुलिसकर्मियों को जेंडर सेंसीटाइजेशन विषय पर जागरूक किया। डा. सिंह कार्यक्रम के समापन सत्र में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभागियों को संबोधित कर रहे थे।
डा. सिंह ने अपने संबोधन में कानून लागू करने में जेंडर पूर्वाग्रह विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि भारत के संविधान में महिलाओं को बराबरी का हक दिया है । इसके लिए कानूनी प्रावधान भी किए गए हैं लेकिन कानून को लागू करने और महिलाओं को उनका हक दिलाने में व्यवस्था भी पक्षपात करती है। उन्होंने कहा कि नारी सृजननी है और बहुत ही मजबूरी में कोई अपराध करती है परंतु अपराध न्याय प्रक्रिया में मजबूरी के लिए भी उसी दंड का प्रावधान है जैसा की पुरुष के लिए। कानून पुरुषों द्वारा पुुरुषों को ध्यान में रखते हुए बनाए गए थे। महिला के हितों और उनकी परिस्थियों को इन कानूनों ध्यान में नहीं रखा गया इसलिए ये कानून आज भी औरत के लिए न्याय प्रदान करनें में उस तरह से कारगर नहीं जैसे की होने चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें देखना चाहिए कि हम कानून को लागू करने में पक्षपात को कैसे दूर कर सकें। उन्होंने हेनरी आइसबन के कथन का उल्लेख करते हुए कहा कि औरतें आज भी पुरुषों द्वारा बनाए कानूनों से आंकी जाती हैं। उन्होंने पुलिस न्यायालय और जेल में महिलओं के प्रति पूर्वाग्रही व्यवहार को दूर करने के लिए और महिलाओं को न्याय व सम्मान प्रदान करने के लिए सुझाव देते हुए कहा कि जब महिलाओं की अपराध करने की परिस्थिति पुरुषों से अलग है तो उनके लिए भारतीय दंड संहिता व दंड प्रक्रिया संहिता भी अलग से बनाई जाए। महिला अपराधियों के लिए बच्चों की तरह ही अलग से अभियोजन प्रक्रिया हो, न्यायालय हों। महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों की विवेचना के अलग से एजेंसी हो। इसके साथ पुलिस में और अधिक महिलाओं को शामिल किया जाए और उन्हें और अधिक जिम्मेदारियां भी दी जाएं। जो महिलाएं किसी अपराध में सजा होकर जेलों में बंद है उनसे उनका परिवार पूरी तरह से संबंध तोड़ लेता है जबकि पुुरुषों के साथ ऐसी स्थिति नहीं नहीं होती। इसलिए ऐसी महिलाओं के पुनर्वास के लिए भी समाज व संस्थाओं को आगे आना चाहिए। इससे उसमें सुधार लाने की प्रक्रिया को बल मिलेगा और न्याय का उद्देश्य पूरा होगा। महिला विरुद्ध अपराधों में पुलिस की प्रतिक्रिया कैसे हो इस बारे में मार्गदर्शन करते हुए डा. सिंह ने कहा कि पुलिस इन मामलों की पूर्व रोकथाम के लिए समुदाय के साथ मिलकर कार्य करे। घटना की सूचना पर तुरंत संज्ञान ले और पीडि़त की बात को सहानुभूतिपूर्वक सुने। उन्होंने महिला संबधी कानून लागू करने में निष्पक्षा हेतु एक संवेदनशील और आत्मा वाली व्यवस्था को की जरूरत पर बल दिया। डा. सिंह ने कार्यक्रम के समापन अवसर पर प्रतिभागी पुलिसअधिकारियों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किए।
कार्यक्रम में अकादमी के पुलिस अधीक्षक सुमेर प्रताप सिंह ने मुख्य अतिथि का स्वागत तथा प्रशिक्षण सलहाकार व पूर्व पुलिस महानिरीक्षक सतप्रकाश रंगा ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम निदेशक डीए शशिकांत शर्मा ने कार्यक्रम रिपोर्ट प्र्रस्तुत की। प्रतिभागियों की ओर से हिमाचल प्रदेश पुलिस के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक विरेंद्र सिंह ठाकुर एवं उप निरीक्षक श्याम ङ्क्षसह ने अपने विचार रखे। इससे पूर्व आज बचपन बचाओ आंदोलन की ज्योति माथुर व हरियाणा पुलिस बिजली वितरण निगम में पुलिस महानिरीक्षक चारू बाली ने जेंडर मामलों को लेकर प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया।
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फोटो कैप्शन :
फोटो संख्या 1 - हरियाणा मानवाधिकार आयोग के महानिदेशक डा. केपी सिंह, हरियाणा पुलिस अकादमी मधुबन में जेंडर सेंसीटाइजेशन विषय पर पुलिस अधिकारियों को संबोधित करते हुए।
फोटों संख्या 2 व 3 - हरियाणा मानवाधिकार आयोग के महानिदेशक डा. केपी सिंह, हरियाणा पुलिस अकादमी मधुबन में जेंडर सेंसीटाइजेशन प्रशिक्षण कार्यक्रम समापन अवसर पर प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान करते हुए।

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