हरियाणा

सुरजेवाला और दिज्विजय का राजनैतिक भविष्य लिखेगा उप-चुनाव

चंडीगढ़(ईश्वर धामु):जींद में 28 जनवरी को होने वाले विधानसभा उप-चुनाव में 27 उम्मीदवारों के राजनैतिक भाज्य का फैसला 1.70 लाख मतदाता करेंगे। सभी राजनैतिक दलों ने जीत के लिए अपनी ताकत झौंकनी शुरू कर दी है। पार्टियों के बड़े नेताओं ने जींद में डेरा लगाना शुरू कर दिया है। इस उप-चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी रणदीप सुरजेवाला और जन नायक जनता पार्टी के प्रत्याशी दिज्विजय चौटाला मुख्य रूप से चर्चाओं में हैं। जंहा जेजे पार्टी के युवा प्रत्याशी दिज्विजय चौटाला का यह पहला चुनाव है, वहीं उनकी पार्टी का भी पहला चुनाव है। इस उप चुनाव में दिज्विजय सबसे कम उमर के प्रत्याशी हैं। हरियाणा के चर्चित राजनैतिक चौटाला परिवार से दिज्विजय की राजनीति की शुरूआत छात्र राजनीति से हुई। वें चर्चाओं में उस समय आए जब उन्होने हरियाणा के कालेजों के छात्र संगठन चुनाव करवाने के लिए मुहिम चलाई और हिसार में गुरू जम्भेश्वर विश्वविद्यालय पर अनशन किया। इनसो के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिज्विजय चौटाला की नजरें चुनाव में छात्र शक्ति पर भी है। इस उप चुनाव के परिणाम यह भी साबित करेंगे कि ताऊ देवीलाल की राजनैतिक विरासत पर चाचा और भतीजे में से कौन क्लेम करने का हकदार है? क्योकि इनेलो के झंडे तले पार्टी सुप्रीमो ओम प्रकाश चौटाला के सानिध्य में अभय चौटाला और पार्टी से बगावत कर अपने पिताश्री डाक्टर अजय चौटाला की छत्रछाया में नया दल जन नायक जनता पार्टी का गठन करके राजनीति कर रहे सांसद दुष्यंत चौटाला, दोनो ही ताऊ देवी लाल के नाम पर राजनीति कर रहे हैं। जेजे पार्टी के झंडे पर तो ताऊ की फोटो भी लगाई हुई है। लेकिन ताऊ देवीलाल की अभी तक राजनैतिक वसीयत सम्भाले हुए ओम प्रकाश चौटाला का आशीर्वाद इनेलो के साथ है और एक तरह से उन्होने अपनी राजनैतिक धरोहर अभय चौटाला को सम्भालवा दी है। अब वोट के माध्यम से जींद की जनता इस पर मोहर लगायेगी कि ताऊ की राजनैतिक वसीयत किसको मिलनी चाहिए? दूसरी ओर, 6 बार चुनाव लड़ चुके रणदीप सुरजेवाला की राजनैतिक जीवन की शुरूआत केवल 17 साल की उमर से ही हो गई थी। पहली बार उनको युवा कांग्रेस का प्रदेश महासचिव बनाया गया था। भारतीय युवा कांगे्रस के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने वाले वें पहले हरियाणवी थे। उनका पांच साल का कार्यकाल अब तक का इस पद पर सर्वाधिक समय है। केवल 37 साल की उमर में ही उन्होने कांग्रेस के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष पद पा लिया था। वर्ष 1996 और 2005 के चुनावों में उन्होंने ओम प्रकाश चौटाला को हराया था, जो कि तत्कालीन मुख्यमंत्री थे। वर्ष 2014 के चुनावों में कांग्रेस प्रदेश में निराशाजनक प्रदर्शन करते हुए तीसरे स्थान पर रही, किंतु रणदीप सुरजेवाला अपनी सीट से पुन: निर्वाचित होने में सफल रहे। हुड्डा मंत्रिमंडल में वें सबसे कम उमर के मंत्री रहे हैं। अब कांग्रेस ने उनको जींद उप चुनाव में उतार कर इस उप-चुनाव को एक नया रंग दे दिया है। यह उप चुनाव सुरजेवाला का राजनैतिक भविष्य तय करेगा। अगर वें जीत जाते हैं तो आने वाले विधानसभा के आम चुनाव में मुख्यमंत्री के लिए सशक्त दावेदार रहेंगे। कांग्रेस ने जो दांव उन पर खेला है, उसके दूरगामी परिणाम रहेंगे। इनके साथ ही इस उप चुनाव में पूर्व मंत्री मांगेराम गुप्ता एक ऐसा व्यक्तित्व है, जो चुनावी मैदान में न होते हुए भी सर्वाधिक चर्चाओं में हैं। जींद उप चुनाव की घोषणा के साथ ही मांगेराम गुप्ता चर्चाओं में आ गए थे। क्योकि प्रारम्भ में भाजपा उनको अपना उम्मीदवार बनाना चाह रही थी। अब सभी प्रमुख प्रत्याशी उनके निवास पर हाजरी लगा चुके हैं। अभी तक उन्होने अपना राजनैतिक आशीर्वाद किसी भी पार्टी को नहीं दिया है।

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