हरियाणा

नगर निगम चुनाव में कांग्रेस पर भारी पड़ा भाजपा का संगठन कैडर

ईश्वर धामु 
चंडीगढ़:हरियाणा के पांच नगर निगमों के चुनाव परिणामों ने राजनीति को फिर बदल दिया है। पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा के सामने प्रश्न चिंह आ गया था। इन चुनाव परिणामों का प्रभाव हरियाणा पर सीधे रूप से पड़ा। क्योकि पड़ोसी राज्य राजस्थान मेें  भाजपा चुनाव हार गई थी। चुनावी हार के परिणाम और प्रभाव से बचने के लिए पार्टी ने मंथन और चिंतन प्रारम्भ कर दिया था। परन्तु इसी के चलते पांच नगर निगमों के चुनाव आ गए। भाजपा ने ये चुनाव पार्टी स्तर पर लड़े और पांचों निगमों के मेयर पद पर कब्जा जमा लिया। इसके बाद तो भाजपा नेताओं को सांस के साथ आश भी मिल गई। चुनाव परिणामों के साथ ही भाजपा नेताओं ने कांग्रेस  ताबड़ तोड़ हल्ला बोलना शुरू कर दिया। हालांकि कांग्रेस ने पार्टी स्तर पर चुनाव चिंह के साथ चुनाव नहीं लड़ा था। परन्तु पार्टी ने हर स्तर पर प्रत्याशियों को अपना समर्थन दिया था। नव गठित जन नाये जनता पार्टी इन चुनावों से दूर रही तो इनेलो ने अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे। हालाकिं इनेलो का शहरी क्षेत्र में वोट बढ़ा है। पर कांग्रेस को ये चुनाव एक बड़ा सबक सिखा गए। यह बात सही है कि शहरी सरकार के चुनाव और देश या प्रदेश सरकार के लिए सरकार के चुनाव में मुद्दों और माहौल का बड़ा प्रभाव रहता है। क्योकि 2014 में भाजपा के महीं भी मेयर या चेयरमैन नहीं थे और पार्टी ने चुनाव जीता और सरकार बनाई। लेकिन इस सच से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि आम चुनाव से पहले हुए इन चुनाव के परिणामों को भाजपा जिंदा रखेगी और इनको भुनाया भी जायेगा। यह भी स्पष्ट है कि यें चुनाव भाजपा ने पार्टी स्तर पर लड़े थे और कांग्रेस ने व्यक्तिगत स्तर पर चुनाव लड़ा था। जंहा एक गुट किसी प्रत्याशी को स्पोर्ट कर रहा था तो दूसरा गुट चुनाव से दूरी बनाए हुए था। इतना ही नहीं जंहा भाजपा के संगठन का कैडर काम कर रहा था, वहीं कांग्रेस के पास बिखरा संगठन था। क्योकि चार साल बाद भी कांग्रेस के जिला स्तर पर पदाधिकारी ही नहीं हैं। कांग्रेस का जमीनी स्तर पर जो कार्यकर्ता दिखाई दे रहा है, वो पार्टी स्तर का न होकर व्यक्तिगत स्तर का है। वो पार्टी के लिए नहीं अपने नेता के लिए काम करता है। भाजपा ने संगठन और पार्टी स्तर पर इन चुनाव में पूरी ताकत लगाई हुई थी, वहां कांग्रेस का कोई बड़ा नेता चुुुनाव प्रचार के लिए नहीं आया। जबकि भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री ने खुद अपने प्रत्याशियों का प्रचार किया। चर्चाकार कहते हैं कि पांच नगर निगमों के चुनाव परिणामों का असर अब कांग्रेस के संगठन पर जल्द ही देखने को मिलेगा। समझा जाता है कि कांग्रेस आलाकमान इन चुनाव परिणामों को गम्भीरता से ले रही है। नेताओं ने पार्टी आलकमान के पास पूरी जानकारी पहुंचा दी है। कांग्रेस से जुड़े सूत्र बताते हैं कि जल्द ही आलाकमान इस बारे में प्रदेश प्रभारी और प्रादेशिक नेताओं से चर्चा करेगी। लगता है कि दिसम्बर का महीना हरियाणा कांग्रेस के लिए परिवर्तन माह हो सकता है। 

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