न्यायालयों से

बंसीलाल विल मामला: श्रुति की याचिका को खारिज किया

भिवानी : पूर्व मुख्यमंत्री स्व.बंसीलाल की वसीयत को लेकर उपजे विवाद का आज पटाक्षेप हो गया। भिवानी की अदालत ने वसीयत के मामले में सुनवाई करते हुए श्रुति चौधरी द्वारा दायर की गई याचिका को खारिज कर दिया जबकि पूर्व विधायक रणबीर सिंह महेंद्रा द्वारा पेश की गई ट्रस्ट की वसीयत को सही पाया। यहां सिविल जज जूनियर डिविजन आशुतोष की अदालत ने शनिवार को यह फैसला सुनाया है। अदालत में दायर याचिका
में चौधरी बंसीलाल की पौत्री श्रुति चौधरी ने कहा था कि 6 जून 2004 को उसके पिता सुरेंद्र सिंह व दादा चौधरी बंसीलाल ने संयुक्त रूप से एक
वसीयत उसके हक में की थी। जिसमें उसे कोठी समेत अन्य सम्पत्ति का
उत्तराधिकारी बताया गया था। यह विल ही असली है। वहीं दूसरी तरफ रणबीर सिंह महेंद्रा ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए कहा था कि 19 जुलाई 2005में चौधरी बंसीलाल ने चण्डीगढ़ के सब रजिस्ट्रार कार्यालय में एक विल रजिस्टर्ड करवाई थी,जिसमें कहा गया कि उनकी सम्पत्ति की हकदार उनकी पत्नी
विधा देवी हैं। चौधरी बंसीलाल की मृत्यु के उपरांत विधा देवी ने चौधरी
बंसीलाल की सम्पत्ति व अपनी स्वयं की सम्पत्ति को मिलाकर चौधरी बंसीलाल मैमोरियल ट्रस्ट का गठन किया। विधा देवी स्वयं उसकी प्रधान बनी और पारिवारीक सदस्यों को भी शामिल किया गया। इस विल को श्रुति चौधरी ने अदालत में चुनौती दी थी और बंसीलाल की सम्पत्ति पर अपना हक जमाया था।जिस पर अदालत में लंबी सुनवाई हुई। दोनों पक्षों की तरफ से अदालत में कई गवाहियां भी करवाई गई। रणबीर सिंह महेंद्रा की तरफ से अदालत में पेश हुए
वरिष्ठ अधिवक्ता अविनाश सरदाना ने बताया कि शनिवार को इस मामले की सुनवाई करते हुए यहां सिविल जज जूनियर डिविजन आशुतोष की अदालत ने श्रुति चौधरी
द्वारा दायर की गई याचिका को खारिज कर दिया और रणबीर सिंह महेंद्रा द्वारा प्रस्तुत की गई विल को असली करार दिया। अदालत ने कहा कि श्रुति चौधरी द्वारा प्रस्तुत की गई विल रजिस्टर्ड नहीं है जबकि दूसरे पक्ष ने रजिस्टर्ड विल प्रस्तुत की। इसलिए यह प्रोपर्टी चौधरी बंसीलाल मैमोरियल ट्रस्ट की ही रहेगी।

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