हरियाणा

जेल में किसान की मृत्यु के मामले में बैंक अपराधी है। तुरन्त कानूनी कार्रवाई की जाए : स्वराज इंडिया

भिवानी जिले में ऋण ना लौटा पाने के मामले में जेल गए किसान की मृत्यु के लिए किसान की नहीं, हमारी पूरी व्यवस्था और बैंक की अपराधिक जिम्मेवारी बनती है। भविष्य में बैंक किसी किसान की ऐसी प्रताड़ना न कर सकें इसके लिए स्वराज इंडिया कानूनी लड़ाई लड़ेगा। मृतक किसान रणबीर सिंह का दोष यह था कि उसका बकाया सिर्फ 9 लाख रुपए था। अगर उसका बकाया 9 करोड़ या 9000 करोड़ होता तो वह लंदन में ऐश कर रहा होता।

यह घोषणा स्वराज इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री योगेंद्र यादव ने भिवानी जिले के ढाणी कहर के किसान स्वर्गीय रणबीर सिंह चौहान के घर शोक संतप्त परिवार से मिलने के बाद की। उन्होंने कहा कि यह ऋण ना चुका पाने के लिए जेल का सीधा मामला नहीं है। इस मामले में संबंधित बैंक ने एक नहीं कई आपराधिक कृत्य किए हैं जिनके लिए उनकी आपराधिक जिम्मेवारी बनती है। यह मामला 1996 में लिए गए मैच डेढ़ लाख रुपए के लोन का है जिसे बार बार अलग अलग नाम से बदलकर प्याज चढ़ाया गया और जो ₹972000 का बन गया इस मामले में बैंक ने अनेक नियमों का उल्लंघन किया।

पहला बैंक ने हरियाणा कृषि ऋण कानून का उल्लंघन किया जिसके तहत ₹300000 के ऋण पर₹800000 से अधिक की वसूली किसी भी हालत में नहीं हो सकती दूसरा बैंक ने किसानों से पुरानी चेकबुक पर ब्लैंक चेक ले लिया जो अब बैंक में प्रस्तुत भी नहीं हो सकता वैसे भी रिजर्व बैंक के अनुसार ब्लैंक चेक लेना गैरकानूनी है तीसरा बैंक को जब अपनी अपना ऋण वापस नहीं मिला तब उसने ऋण वापसी की दीवानी कार्यवाही करने की बजाय पुराने ब्लैंक चेक का इस्तेमाल करते हुए चेक बाउंस होने का अपराधिक मुकदमा बना दिया।

वहां मौजूद किसान सभा के प्रदेश सचिव डॉक्टर बलबीर सिंह ने मामले पर प्रकाश डालते हुए कहा की किसान की मृत्यु आम नहीं थी यह तो बैंक द्वारा किया गया अपराध था जो नियमों का उल्लंघनकर किसान को जेल भिजवाया गया।

बैंकों द्वारा इन हथकंडो का इस्तेमाल करना अब एक आम बात बन गई है। इसे रोकने के लिए यह जरूरी है की इस मामले में बैंक के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में बैंक इन हरकतों से बाज आएं। यह मामला हमारी पूरी राजनीतिक व्यवस्था के दुबलेपन को दर्शाता है जहां एक तरफ विजय माल्या, नीरव मोदी और मेहुल चोकसी जैसे लोग बैंकों के हजारों करोड़ रुपए डकार कर विदेशों में गुल छर्रे उड़ा रहे हैं वहीं केवल डेढ़ लाख रुपए के रिंको न लौटा सकने वाले किसान को जिंदगी से हाथ धोना पड़ता है।

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