हरियाणा

डिनोटिफाई कानून में संशोधन को मिली मंजूरी, किसान बोले- नहीं छोड़ेंगे धरना

COURSTEY DANIK JAGRAN  MAY 3

कोर्ट में सिंचाई विभाग का दावा
कोर्ट में सिंचाई विभाग का दावा

भास्कर न्यूज | यमुनानगर

 

दादूपुर नलवी नहर के मुआवजे को लेकर चल रही सुनवाई में किसानों को झटका लगा है। सिंचाई विभाग के स्पेशल सेक्रेटरी आरएस वर्मा ने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए बताया कि नहर को डिनोटिफाई करने के लिए कानून में संशोधन करने की राष्ट्रपति से मंजूरी मिल गई है। अब करीब एक माह में संशोधन कर गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया जाएगा। एडीजे नरेश कत्याल की कोर्ट में यह सुनवाई चल रही है। इस पक्ष को सुनने के बाद अब इस मामले में अगली सुनवाई नौ जुलाई को होगी। इस सुनवाई के बाद दादूपुर नलवी नहर संघर्ष समिति ने धरना स्थगित करने के लिए मीटिंग भी की, लेकिन किसानों ने धरना जारी रखने पर सहमति दी। जिसके बाद फैसला लिया गया कि धरना जारी रखा जाएगा। गौरतलब है कि जिला सचिवालय के सामने अनाज मंडी गेट पर किसान पिछले दस माह से धरने पर बैठे हैं।
दादूपुर नलवी नहर के मुआवजे को लेकर सतीश कुमार प्रजापत, गुरनाम, रमेश कुमार व अन्य का सरकार के साथ हाईकोर्ट में केस चल रहा है। जिसमें 20 दिसंबर 2017 को हाईकोर्ट ने छह माह के अंदर किसानों को उनका मुआवजा दिए जाने के आदेश दिए थे।
डिनोटिफाई कानून में संशोधन को मिली मंजूरी, किसान बोले- नहीं छोड़ेंगे धरना
दादुपुर नलवी केस|एडीजे कत्याल की कोर्ट में सिंचाई विभाग के स्पेशल सेक्रेटरी ने रखा पक्ष, अगली सुनवाई 19 जुलाई को
यूं चली सुनवाई
कोर्ट : केस का स्टेटस बताइए।
स्पेशल सेक्रेटरी: हमने नहर को डिनोटिफाई करने के बिल में संशोधन की अनुमति के लिए राष्ट्रपति काे फाइल भेजी थी। अब राष्ट्रपति से बिल में संशोधन की अनुमति मिल गई है। इसके अनुसार बिल में संशोधन कर नहर परियोजना को डिनोटिफाई कर दिया जाएगा।
स्पेशल सेक्रेटरी- इस प्रोसेस में 30-40 दिन का समय लगेगा।
कोर्ट- अगली सुनवाई नौ जुलाई 2018 को होगी।
‌Rs.1.16 करोड़ प्रति एकड़ मुआवजे के थे आदेश
दादूपुर नलवी नहर के लिए अधिग्रहित जमीन को लेकर किसान मुआवजे को लेकर हाईकोर्ट गए। हाईकोर्ट ने किसानों के हक में फैसला सुनाते हुए 1.16 करोड़ रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से मुआवजे देने के आदेश दिए। यह फैसला अधिग्रहित 256 एकड़ जमीन को लेकर आया था, लेकिन सरकार ने किसानों को पेमेंट नहीं की। इसके चलते ही किसान धरने पर बैठ गए। सरकार ने नहर को डिनाेटिफाई करने की घोषणा कर दी थी।
यमुनानगर | लघु सचिवालय के बाहर धरनारत किसान मीटिंग करते हुए।
पहले सरकार ने कहा जनहित में परियोजना
वर्ष 2004 में दादूपुर नलवी बंद करने के लिए किसान हाईकोर्ट गए थे। किसानों ने दलील दी कि यहां नहर की खुदाई न की जाए। सरकार ने दलील दी थी कि परियोजना जनहित के लिए है। कोर्ट ने किसानों की याचिका खारिज कर दी। 22 मई 2005 को नहर खोदने का निर्णय लिया। अब वर्तमान सरकार परियोजना को जनहित का न होने की बात कह डिनोटिफाई करने जा रही है।
किसान बोले- हाईकोर्ट जाएंगे
दादूपुर नलवी नहर संघर्ष समिति के प्रधान कश्मीर ढिल्लो, राजेश दहिया व अर्जुन सुढैल का कहना है कि किसानों का धरना चालू रहेगा। हम सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई लड़ेंगे। नहर के डिनोटिफाई होने की अधिसूचना जारी होते ही हम हाईकोर्ट जाएंगे। हाईकोर्ट में 2005 का ऑर्डर भी रखा जाएगा। किसानों ने कहा कि राष्ट्रपति ने दिल्ली के विधायकों को भी अयोग्य ठहराया था, लेकिन हाईकोर्ट से उनकी सुनवाई की। इसी तरह से हम भी हाईकोर्ट जाएंगे। किसानों ने उत्तरी हरियाणा के पांच जिलों में सितंबर माह में पद यात्रा शुरू करने का निर्णय भी लिया है। यह पदयात्रा उत्तरी हरियाणा में जल संकट को लेकर निकाली जाएगी। जिसके जरिए लोगों को जागरूक भी किया जाएगा।

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