कर्मचारियों की पुकार

सी.आई.टी.यू. एवं अ.भा.खेत मजदूर यूनियन की हरियाणा राज्य कमेटियों की ओर से जारी

जीन्द: सीटू व  खेत मजदूर यूनियन की मजदूर ललकार रैली में हजारों-हजार मजदूरों का जनसैलाब उमड़ा। वक्ताओ ने कहा कि सत्ताधारी कांग्रेस समेत शासक वर्ग की तमाम पार्टियां मजदूरों की हालात पर मौन है जो उनके मजदूर विरोधी चरित्र को प्रदर्शित कर रही है। विकास का दावा करने वाली हुड्डा सरकार के राज में मजदूरों व प्रदेश के मेहनतकशों की मेहनत को निचौड़कर सरकार के लग्गे-भग्गे, पूंजीपती, ठेकेदार व नौकरशाह मालामाल हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मजदूर व मेहनतकश हरियाणा के वास्तविक निर्माता हैं इसलिए उन्हें तोहफे नहीं बल्कि अपनी मेहनत का वास्तविक मौल चाहिए। रैली में उमड़ा मजदूरों का यह जनसैलाब सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ मजदूरों में व्याप्त असंतोष का जीता-जागता सबूत है। हरियाणा के इतिहास में मजदूरों की इससे पहले इतनी बड़ी लामबंदी कभी नहीं हुई। इससे जाहिर है कि मजदूर वर्ग जाग उठा है व सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ ललकार रहा है जो इन्हें बदलवाकर ही दम लेगा।

हरियाणा के  कोने कोने से आए हजारों मजदूरों को संबोधित करते हुए सीटू महासचिव व सांसद तपन सेन ने कहा कि सरकार गरीबों को दी जा रही सब्सीढ़ी में कटौती कर रही है जबकि पिछले दो साल में पूंजीपतियों को 10 लाख करोड़ की छूट दी जा रही है। उन्होंने कहा कि दो साल गुजर चुके हैैं जब श्रम सम्मेलन में न्यूनतम वेतन निर्धारण बारे सहमति बनी। परन्तु विकास का दावा करने वाली प्रदेश सरकार मजदूरों के लिए न्यूनतम वेतन क्यों नहीं रिवाईज कर रही जो 15000 रूपये से ज्यादा बनता है। आज हरियाणा देश-विदेश में मजदूरों के भयंकर दमन व पूंजीपतियों की खूली लूट का मॉडल बन गया है। हुड्डा सरकार के काल में होंडा, लिबर्टी, रिक्को, मारूति आदि कितने ही उदाहरण हैं जब मजदूरों पर भयंकर पुलिस दमन हुआ। मारूति के ताजा घटनाक्रम में एक मजदूर की दुखद: मौत का बहाना बनाकर हरियाणा व आस-पास के सैंकड़ो मजदूरों को 16 महीने से जेल में ठूंस रखा है। जबकि आए दिन उद्योगो में मजदूर दुर्घटनाओं में मारे जा रहे हैं व किसी उद्योगपति के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं होती। इस सबके खिलाफ 12 दिसंबर को सभी केन्द्रीय ट््रेड यूनियनें व कर्मचारी संघ संसद घेरेंगे।

अखिल भारतीय खेत मजदूर यूनियन के राष्ट््रीय संयुक्त सचिव व पूर्व सांसद हन्नान मोल्ला ने कहा कि देश में 20 करोड़ खेतिहार मजदूर हैं जिनके लिए कोई कानून नहीं है। खुद सरकार का अपना सर्वे है कि खेत मजदूरों को वर्ष भर में उसे केवल 57 दिन रोजगार मिलता है। आखिर इतनी भारी महंगाई में कैसे जिया जाए। बड़ी लड़ाई के बाद मनरेगा कानून बनवाया गया परन्तु अभी 100 दिन में से केवल 34 दिन ही रोजगार मिल रहा है। मनरेगा के पैसे को सरकार व उसके लग्गे-भग्गे मिल बांट कर चाट रहे है। राज्य की हुडडा सरकार किसानों की जमीन कौडिय़ों के भाव खरीद कर पूंजीपतियों को दे रही है व एक प्रापर्टी डीलर बन गई व भूमि अधिग्रहण में खेत मजदूरों  को कोई राहत नहीं है।

सीटू राष्ट््रीय सचिव डा. के. हेमलता ने कहा कि महिला मजदूरों का बड़ा हिस्सा असंगठित क्षेत्र में काम करने को मजबूर हो रहा है जिसकी सामाजिक सुरक्षा की कोई गारंटी नहीं है। परियोजनाओं के नाम पर आंगनबाड़ी, आशा, मिड डे मील कर्मियों को मामूली मानदेय व प्रोत्शाहन राशि देकर महिलाओं के श्रम की लूट का नया तरीका निकाला गया है। उन्होंने राज्य की कांग्रेस सरकार से कहा कि क्यों नहीं वह इन वर्करों को कर्मचारी का दर्जा दे रही। वह कम से कम इनका वेतन बढ़ाकर न्यूनतम वेतन के स्तर पर तो ला ही सकती है। सभी कामकाजी महिलाओं को वेतन सहित 6 महीने का मातृत्व लाभ मिलना चाहिए। सीटू प्रदेशअध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह व सतबीर सिंह ने कहा कि असगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए सरकार ने बोर्ड तक गठित नहीं किया है। सीटू नेताओ ने कहा कि भवन निर्माण के क्षेत्र में लगे मजदूरों का रजिस्टर््ेशन नहीं हो रहा व श्रम कल्याण बोर्ड के तहत सुविधाएं नहीं दी जा रही। भटृठा मजदूरों को बोर्ड में शामिल नहीं किया जा रहा। क्यों नहीं हरियाणा सरकार कच्चे कर्मचारियों व परियोजनाकर्मियों को पक्का कर्मचारी बनाने की घौषणा कर रही।

रैली को संबोधित करते हुए खेत मजदूर यूनियन के राज्याध्यक्ष रामकुमार बहबलपुरिया महासचिव रामअवतार ने कहा कि राज्य की हुड्डा सरकार संविधान की प्रस्थापनाओं को ही पलटने का काम कर रही है। हरियाणा सरकार ने भूमि हदबंदी कानून को बदल कर भूमि सुधार कानून को ही बेमाने कर दिया है। केन्द्र व राज्य सरकार सबसे बड़ी जमाखोर बनी हुई है। गरीबों के आट्टे के पीपे खाली है व अनाज सड़ रहा है। दलितों व गरीब लोगों पर हमले बढ़ रहे हैं तथा राज्य सरकार व शासन-प्रशासन हमलावरों के साथ खड़ा मिलता है।

सीपीआई एम के राज्य सचिव का. इन्द्रजीत सिंह ने कहा कि सीपीआई एम हमेशा गरीबों व मेहनकशों के पक्ष में आन्दोलन करती रही है। पूंजीपतियों की पार्टियां समर्थन तक नहीं कर रही है। कल गोहाना में सरकार तमाम लालच-प्रलोभन देकर व दाब-धौंष देकर व सरकारी मशीनरी का दुरूपयोग करके भीड़ इक_ा करने के प्रयास हो रहे हैं। असली फौज ेआज इस पंडाल में है जो अपना पैसा खर्च करके अपने मुद्दों पर इक_ा हुए हैं।

रैली को सर्व कर्मचारी संघ के राज्याध्यक्ष धर्मबीर फौगाट, सीटू नेताओं रमेश चन्द्र,सुखबीर,सुरेखा, किसान सभा के नेता फूल सिंह श्योकंद, खेत मजदूर यूनियन के नेता प्रकाश चन्द्र आदि ने भी संबोधित किया। रैली ने 13-14 नवंबर की राज्य के रोडवेजकर्मियों की हड़ताल को समर्थन देते हुए 13 नवंबर को ब्लाक स्तर पर प्रदर्शन करने व 12 दिसंबर को ट््रेड यूनियनों के संसद मार्च में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने का फैसला लिया गया। रैली ने सरकार को चेताया कि यदि मुख्यमंत्री महोदय के पास भेजे गए 20 सुत्रीय मांग-पत्र पर कार्यवाही नहीं होती है तो 15 नवंबर को राज्य स्तर पर केन्द्रीय ट््रेड यूनियनों व कर्मचारी संघों की होने वाली बैठक में आगामी आन्दोलन का बिगुल बजेगा। सीटू व खेत मजदूर यूनियन के कार्यकर्ता जनवरी महीने में 72 घण्टे तक जिला उपायुक्त

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